श्री श्री रविशंकर के सुवचन | Sri Sri Ravi Shankar Quotes in Hindi

श्री श्री रविशंकर के सुवचन | Sri Sri Ravi Shankar Quotes in Hindiश्री श्री रविशंकर भारत के एक आध्यात्मिक गुरु है जो एक धार्मिक नेता और Art of Living Foundation के संस्थापक है। उन्होंने अपने आर्ट ऑफ़ लिविंग फाउंडेशन के माध्यम से देश विदेश के कई लोगो को खुश रहने की कला सिखाई है जिससे करोड़ो लोग के जीवन पर असर पड़ा है। आइये जाने इस महान गुरूजी के कथन और अनमोल वचन..

श्री श्री रविशंकर के महत्वपूर्ण अनमोल विचार – Sri Sri Ravi Shankar Quotes 


Quote 1: असफलता भविष्य में सफलता प्राप्त करने की अच्छी विधि है।

Quote 2: यदि तुम लोगों का भला करते हो, तुम अपनी प्रकृति की वजह से करते हो।

Quote 3: प्रेम अर्थात सभी कुछ देना और कुछ भी नहीं लेना।

Quote 4: आध्यात्मक ज्ञान की शक्ति आपको केन्द्रीकरण प्रदान करती है जिससे आपको कार्य के प्रति जुनून प्राप्त होता है। आध्यात्मिक ज्ञान आपकी अन्तज्र्ञान शक्ति, मौलिक शक्ति और संवाद क्षमता को बढ़ाता है।

Quote 5: बुद्धिमान वो है जो औरों की गलती से सीखता है। थोडा कम बुद्धिमान वो है जो सिर्फ अपनी गलती से सीखता है। मूर्ख एक ही गलती बार बार दोहराते रहते हैं और उनसे कभी सीख नहीं लेते।

Quote 6: अपने कार्य के पीछे की मंशा को देखो, अक्सर तुम उस चीज के लिए नहीं जाते जो तुम्हे सच में चाहिए।

Quote 7: श्रद्धा यह समझने में है कि आप हमेशा वो पा जाते हैं जिसकी आपकी ज़रुरत होती है।

Quote 8: “आज” भगवान का दिया हुआ एक उपहार है- इसीलिए इसे “प्रेजेंट” कहते हैं।

Quote 9: सृष्टि उनकी ही मदद करती है जिनके उद्देश्य स्पष्ट और शुद्ध होते हैं।

Quote 10: मानव विकास के दो चरण हैं- कुछ होने से कुछ ना होना;और कुछ ना होने से सबकुछ होना. यह ज्ञान दुनिया भर में योगदान और देखभाल ला सकता है।

Quote 11: वर्तमान ईश्वर द्वारा प्रदत्त उपहार है। इसीलिए इसे अंग्रेज़ी में प्रेज़ेंट कहते हैं।

Quote 12: जब आप अपना दुःख बांटते हैं, वो कम नहीं होता। जब आप अपनी ख़ुशी बांटने से रह जाते हैं, वो कम हो जाती है। अपनी समस्याओं को सिर्फ ईश्वर से सांझा करें, और किसी से नहीं, क्योंकि ऐसा करना सिर्फ आपकी समस्या को बढ़ाएगा। अपनी ख़ुशी सबके साथ बांटें।

Quote 13: तो क्या अगर कोई तुम्हे पहचानता है: ओह, तुम एक शानदार व्यक्ति हो. तो क्या? उस व्यक्ति के दिमाग में वो विचार आया और गया। वह भी ख़त्म हो गया। वो विचार चला गया। हो सकता है कि कुछ दिन, कुछ महीने वो तुम्हारे प्रति आकर्षित रहे, तो क्या? वो भी चला जाता है, ये भी चला जाता है।

Quote 14: दूसरों को सुनो; फिर भी मत सुनो। अगर तुम्हारा दिमाग उनकी समस्याओं में उलझ जाएगा, ना सिर्फ वो दुखी होंगे, बल्कि तुम भी दुखी हो जओगे।

Quote 15: जि़न्दगी तुम्हें सकारात्मकता और नकारात्मकता दोनों प्रदान करेगी। केवल अच्छे अवसरों पर ध्यान दो और वचनबद्धता के साथ आगे बढ़ते जाओ।

Quote 16: आप केवल शांत और स्थिर रहें। आपको अपने सभी प्रश्नों के उत्तर स्वतः ही प्राप्त होते जायेंगे।

Quote 17: चाहत, या इच्छा तब पैदा होती है जब आप खुश नहीं होते। क्याआपने देखा है? जब आप बहुत खुश होते हैं तब संतोष होता है। संतोष का अर्थ है कोई इच्छा ना होना।

Quote 18: सफलता के लिए बेचैन मत होइए। यदि आपका लक्ष्य साफ है और आप में आगे बढ़ने का धैर्य है तो प्रकृति भी आपकी मदद करेगी।

Quote 19: जीवन ऐसा कुछ नहीं है जिसके प्रति बहुत गंभीर रहा जाए। जीवन तुम्हारे हाथों में खेलने के लिए एक गेंद है। गेंद को पकड़े मत रहो।

Quote 20: वचनबद्धता यानि आपकी क्षमताओं का खिंचाव है जो आपको प्रत्येक रूकावट के पार ले जाती है।

Quote 21: स्वर्ग से कितना दूर? बस अपनी आँखें खोलो और देखो. तुम स्वर्ग में हो।

Quote 22: हमेशा आराम की चाहत में, तुम आलसी हो जाते हो। हमेशा पूर्णता की चाहत में तुम क्रोधित हो जाते हो। हमेशा अमीर बनने की चाहत में तुम लालची हो जाते हो।

Quote 23: प्रसन्न रहने की आदत डालो। यह तुम्हें ही करना है और तुम्हारे लिए यह कोई और नहीं कर सकता।

Quote 24: न तो आप बहुत ज़्यादा लापरवाह रहें और न ही बेचैन हों। आपको बीच का रास्ता अपनाना चाहिए।

Quote 25: यदि आप सदैव आराम चाहेंगे तो आप आलसी हो जायेंगे। यदि आप सदैव प्रवीणता चाहेंगे तो आप क्रोधी हो जायेंगे और यदि आप सदैव अमीर बनना चाहेंगे तो आप लालची हो जायेंगे।

Quote 26: ज्ञान बोझ है यदि वह आपके भोलेपन को छीनता है। ज्ञान बोझ है यदि वह आपके जीवन में एकीकृत नहीं है। ज्ञान बोझ है यदि वह प्रसन्नता नही लाता। ज्ञान बोझ है यदि वह आपको यह विचार देता है कि आप बुद्धिमान हैं। ज्ञान बोझ है यदि वह आपको स्वतंत्र नहीं करता। ज्ञान बोझ है यदि वह आपको यह प्रतीत कराता है कि आप विशेष हैं।

Quote 27: अभिप्रेरणा और प्रेरणा में अन्तर है। अभिप्रेरणा बाहर से होती है और कम समय रहती है जबकि प्रेरणा आंतरिक है और दीर्घ काल तक रहती है।

Quote 28: स्वयं अध्यन कर के, देख कर, खोखले और खली होकर, तुम एक माध्यम बन जाते हो– तुम परमात्मा का अंश बन जाते हो। तुम देवत्त्व की उपस्थिति को महसूस कर सकते हो। सभी स्वर्गदूत और देवता, हमारी  चेतना के ये विभिन्न रूप खिलने लगते हैं।

Quote 29: यदि आप अपने मन को जीत लेते हैं, तो आप सारा संसार जीत सकते हैं।

Quote 30: जहाँ भी सच्चाई और प्रतिभा है उसे पहचाना जाता है। इसमें कुछ वक्त लग सकता है। लेकिन हमें चाहिए कि हम धैर्य के साथ अपने जुनून के प्रति समर्पित रहें।

Quote 31: मैं आपसे बताता हूँ, आपके भीतर एक परमानंद का फव्वारा है, प्रसन्नता का झरना है। आपके मूल के भीतर सत्य, प्रकाश, प्रेम है, वहां कोई अपराध बोध नहीं है, वहां कोई डर नहीं है. मनोवैज्ञानिकों ने कभी इतनी गहराई में नहीं देखा।

Quote 32: किसी ऐसे से प्रेम करना जिसे तुम चाहते हो नगण्य है किसी से इसलिए प्रेम करना क्योंकि वो तुमसे प्रेम करता है महत्त्वहीन है। किसी ऐसे से प्रेम करना जिसे तुम नहीं चाहते, मतलब तुमने जीवन का एक सबक सीख लिया है। किसी ऐसे से प्रेम करना जो बिना वजह तुम पर दोष मढ़े; दर्शाता है कि तुमने जीने की कला सीख ली है।

Quote 33: एक निर्धन व्यक्ति नया साल वर्ष में एक बार मनाता है। एक धनाड्य व्यक्ति हर दिन. लेकिन जो सबसे समृद्ध होता है वह हर क्षण मनाता है।

Quote 34: प्रेम कोई अहसास या भावना नहीं यह तो आपका अस्तित्व है| प्रेम में गिरो नहीं ऊपर की ओर उठो।

Quote 35: तुम दिव्य हो. तुम मेरा हिस्सा हो, मैं तुम्हारा हिस्सा हूँ।

Quote 36: प्रेम कोई भावना नहीं है, यह आपका अस्तित्व है।

Quote 37: तुम्हे सर्वोच्च आशीर्वाद दिया गया है, इस गृह का सबसे अनमोल ज्ञान दिया गया है। तुम दिव्य हो; तुम परमात्मा का हिस्सा हो. विश्वास के साथ बढ़ो. यह अहंकार नहीं है. यह पुन: प्रेम है।

Quote 38: इस बात में विश्वास रखें कि कोई आपको, आपकी कमजोरियों से दूर ले जा रहा है। आप एक, दो या तीन बार गिरते हैं ये मायने नहीं रखता है। आप आगे बढ़ते चले जाइए।

Quote 39: तुम्हारा मस्तिष्क भागने की सोच रहा है और उस अस्तर पर जाने का प्रयास नहीं कर रहा है जहाँ गुरु ले जाना चाहते हैं, तुम्हे उठाना चाहते हैं।

Quote 40: इच्छा हमेशा मैं पर लटकती रहती है। जब स्वयं मैं लुप्त हो रहा हो, इच्छा भी समाप्त हो जाती है, ओझल हो जाती है।

Quote 41: हर एक चीज के पीछे तुम्हारा अहंकार है: मैं, मैं, मैं, मैं. लेकिन सेवा में कोई मैं नहीं है, क्योंकि यह किसी और के लिए करनी होती है।

Quote 42: दूसरों को आकर्षित करने में काफी उर्जा बर्वाद होती है, और दूसरों को आकर्षित करने की चाहत में– मैं बताता हूँ, विपरीत होता है।

Quote 43: तुम्हारे अन्दर कोई भावना आई, अप्रिय भावना, और तुमने कहा, नहीं आणि चाहिए, ये फिर से नहीं आनी चाहिए। ऐसा करके तुम उसका विरोध कर रहे हो। जब तुम विरोध करते हो, वो कायम रहती है। बस देखो, ओह! उसकी गहराई में जाओ. नाचो; अपने पैरों पर खड़े हो और नाचो. मस्ती में रहो; मस्ती में चलो।


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1 COMMENT

  1. श्री श्री रविशकर के बेहतरीन विचारों के ऊत्तम संग्रह के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद देती हूँ 🙂

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