अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी | Atal Bihari Vajpayee Biography In Hindi

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Atal Bihari Vajpayee Biography & Life History in Hindi/ भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी एक भारतीय राजनेता और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री (Former Prime Minister) हैं। जो की एक अच्छे हिन्दी कवि, पत्रकार व प्रखर वक्ता भी हैं। वे भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वाले महापुरुषों में से एक हैं। इनका का नाम भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में लिया जाता है।

अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी | Atal Bihari Vajpayee Biography In Hindiअटल बिहारी वाजपेयी का परिचय – Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

पूरा नाम अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee)
जन्म दिनांक 25 दिसंबर, 1924
जन्म स्थान ग्वालियर, मध्य प्रदेश
पिता का नाम पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी
माता का नाम श्रीमती कृष्णा देवी
जीवन साथी अविवाहित
नागरिकता भारतीय
पार्टी भारतीय जनता पार्टी, भारतीय जनसंघ
पद भारत के 11वें प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री
शिक्षा स्नातकोत्तर
पुरस्कार-उपाधि पद्म विभूषण, भारत रत्न

नरसिम्हा राव के बाद 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी मात्र 13 दिन के लिए ही प्रधानमंत्री बने। इसके बाद 1998 में हुए चुनावों के माध्यम से वह दोबारा प्रधानमंत्री बने। इस कारण 1996 और 1998 के मध्य बने दो प्रधानमंत्रियों-एच. डी. देवगौड़ा तथा इन्द्र कुमार गुजराल को आगे स्थान दिया गया है। तत्पश्चात् अटल बिहारी वाजपेयी अक्टूबर, 1999 में पुन: प्रधानमंत्री बने और यह कार्यकाल उन्होंने अत्यन्त सफलतापूर्वक पूर्ण किया। इसके पूर्व वह अप्रैल 1999 से अक्टूबर 1999 तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री भी रहे।

प्रारंभिक जीवन – Eraly Life of Atal Bihari Vajpayee

भारत के 11वें प्रधानमंत्री, कवि व राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को ग्राम ब्रहमूरहुर्त मे ग्वालियर के एक कुलीन घराने में हुआ था। जब उनका जन्म हुआ था तो उस समय पास के ही एक गिरजाघर से घंटों की गूंज और तोप के गोलो की आवाज आ रही थी, जैसे सलामी दी जा रही हो। यह भी एक सुखद संयोग ही था कि जिस दिन अटल जी का जन्म हुआ, उस दिन ईसा मसीह का जन्म दिवस बड़ी धूम धाम से मनाया जा रहा था।

यह तो उल्लेखित ही है कि अटल जी की जन्म तिथि 25 दिसंबर, 1924 हैं, लेकिन उनके स्कूल सर्टिफिकेट में उनकी जन्म तिथि 25 दिसंबर, 1926 अंकित है। उनकी जन्मतिथि 2 वर्षों का अंतर उनके पिता ने इस वजह से कराया था कि उम्र कम लिखी होने के कारण उनका पुत्र अधिक दिनों तक सरकारी सेवा में रहेगा।

अटल जी के पिता का नाम पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता का नाम श्रीमती कृष्णा देवी था। पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी अध्यापक थे। वह बड़े ही सत्यवादी, ईमानदार और अनुशासित व्यक्ति थे। उनके इन्हीं गुणों का अनुसरण उनके बच्चों ने किया। अटलजी स्वभाव से ही सुकोमल, सुकुमार एवं सुंदर थे। घर के सभी सदस्य उन्हे बहुत लाड-प्यार करते थे। अटल जी जब 6 वर्ष के हुए तो उनका पार्टी-पूजन कराया गया।

अटल जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ‘गोरखी विद्यालय’ में प्राप्त की। अटलजी की पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी रुचि थी। उनके प्रिय खेलों में कबड्डी, गुल्ली डंडा, और कांव डंडा इत्यादि थे।

अटल जी की बी.ए. की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज) में हुई। छात्र जीवन से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और तभी से राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे। कानपुर के डी.ए.वी. कालेज से राजनीति शास्त्र में एम.ए. की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। उसके बाद उन्होंने अपने पिताजी के साथ-साथ कानपुर में ही एल.एल.बी. की पढ़ाई भी प्रारम्भ की लेकिन उसे बीच में ही विराम देकर पूरी निष्ठा से संघ के कार्य में जुट गये। डॉ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के निर्देशन में राजनीति का पाठ तो पढ़ा ही, साथ-साथ पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश और वीर अर्जुन जैसे पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन का कार्य भी कुशलता पूर्वक करते रहे। हालांकि उन्होंने विवाह नहीं किया लेकिन उन्होंने बी एन कौल की दो बेटियों नमिता और नंदिता को गोद लिया।

राजनैतिक जीवन – Career of Atal Bihari Vajpayee

वाजपेयी की राजनैतिक यात्रा की शुरुआत एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में हुई। 1942 में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लेने के कारण वह अन्य नेताओं के साथ गिरफ्तार कर लिए गए, और 24 दिन तक कारावास में रहे। इसी समय उनकी मुलाकात श्यामा प्रसाद मुखर्जी से हुई, जो भारतीय जनसंघ यानी बी.जे.एस. के नेता थे। उनके राजनैतिक एजेंडे में वाजपेयी ने सहयोग किया। स्वास्थ्य समस्याओं के चलते मुकर्जी की जल्द ही मृत्यु हो गई और बी.जे.एस. की कमान वाजपेयी ने संभाली और इस संगठन के विचारों और एजेंडे को आगे बढ़ाया। सन 1954 में वह बलरामपुर सीट से संसद सदस्य निर्वाचित हुए। छोटी उम्र के बावजूद वाजपेयी के विस्तृत नजरिए और जानकारी ने उन्हें राजनीति जगत में सम्मान और स्थान दिलाने में मदद की।

1977 में जब मोरारजी देसाई की सरकार बनी, तो वाजपेयी को विदेश मंत्री बनाया गया। दो वर्ष बाद उन्होंने चीन के साथ संबंधों पर चर्चा करने के लिए वहां की यात्रा की। भारत पाकिस्तान के 1971 के युद्ध के कारण प्रभावित हुए भारत-पाकिस्तान के व्यापारिक रिश्ते को सुधारने के लिए उन्होंने पाकिस्तान की यात्रा कर नई पहल की। जब जनता पार्टी ने आर.एस.एस. पर हमला किया, तब उन्होंने 1979 में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। सन 1980 में भारतीय जनता पार्टी की नींव रखने की पहल उनके व बी.जेए.स तथा आर.एस.एस से आए लालकृष्ण आडवाणी और भैरो सिंह शेखावत जैसे साथियों ने रखी। स्थापना के बाद पहले पांच साल वाजपेयी इस पार्टी के अध्यक्ष रहे।

प्रधानमंत्री का पदभार – Former Prime Minister of Atal Bihari Vajpayee

सन 1996 के लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी को में सत्ता में आने का मौका मिला और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री चुने गए। लेकिन बहुमत सिद्ध नहीं कर पाने के कारण सरकार गिर गई, और वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद से मात्र 13 दिनों के बाद ही इस्तीफा देना पड़ गया।

सन 1998 चुनाव में बीजेपी एक बार फिर विभिन्न पार्टियों के सहयोग वाला गठबंधन नेशनल डेमोक्रेटिक अलायन्स के साथ सरकार बनाने में सफल रही पर इस बार भी पार्टी सिर्फ 13 महीनों तक ही सत्ता में रह सकी, क्योंकि ऑल इंडिया द्रविड़ मुन्नेत्र काज़गम ने अपना समर्थन सरकार से वापस ले लिया।

1999 के लोक सभा चुनावों के बाद नेशनल डेमोक्रेटिक अलायन्स (एन.डी.ए.) को सरकार बनाने में सफलता मिली और अटल बिहारी वाजपेयी एक बार फिर प्रधानमंत्री बने। इस बार सरकार ने अपने पांच साल पूरे किए और ऐसा करने वाली पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी।

वाजपेयीजी प्रधानमंत्री बनने के बाद कई सराहनीय कार्य किए, विदेशी निवेश की दिशा में और सूचना तकनीकी के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा दिया। उनकी नई नीतियों और विचारों के परिणाम स्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था ने त्वरित विकास हासिल किया। पाकिस्तान और यू.एस.ए के साथ मैत्रीपूर्ण रिश्ते कायम करके उनकी सरकार ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया। हालाँकि अटल बिहारी वाजपेयी की विदेश नीतियां ज्यादा बदलाव नहीं ला सकीं, फिर भी इन नीतियों को बहुत सराहा गया।

भारत के बहुदलीय लोकतंत्र में ये ऐसे एकमात्र राजनेता हैं, जो प्रायः सभी दलों को स्वीकार्य रहे। इनकी विशेषता के कारण ये 16 मई, 1996 से 31 मई, 1996 तथा 1998-99 और 13 अक्तूबर, 1990 से मई, 2004 तक तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे। इसके अलावा लोकसभा चुनावो में वाजपेयी जी ने नौ बार जीत हासिल की है। भारत की संस्कृति, सभ्यता, राजधर्म, राजनीति और विदेश नीति की इनको गहरी समझ है।

जब उन्होंने स्वास्थ समस्या के चलते राजनीती से सन्यास ले लिया था तब उन्होंने 2009 तक लखनऊ, उत्तर प्रदेश के संसद भवन की सदस्य बनकर भी सेवा की है। वाजपेयी भारतीय जन संघ के संस्थापक सदस्य भी है, वाजपेयी जी में भारतीय जन संघ का संचालन भी किया है।

पुरूस्कार और सम्मान – Atal Bihari Vajpayee Awards

  • देश के लिए अपनी अभूतपूर्व सेवाओं के चलते उन्हें वर्ष 1992 में पद्म विभूषण सम्मान से नवाजा गया।
  • वर्ष 1993 में उन्हें कानपुर विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि का सम्मान प्राप्त हुआ।
  • वर्ष 1994 में अटल बिहारी वाजपेयी को लोकमान्य तिलक अवार्ड से सम्मानित किया गया
  • वर्ष 1994 में पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार भी प्रदान किया गया।
  • वर्ष 1994 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का सम्मान।
  • वर्ष 2015 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया।
  • वर्ष 2015 में बांग्लादेश द्वारा ‘लिबरेशन वार अवार्ड’ (बांग्लादेश मुक्तिजुद्धो संमनोना) दिया गया।

अटल बिहारी वाजपेयी की किताबें – Atal Bihari Vajpayee Books

  • अटल बिहारी वाज मेम टीना दसका (1992)
  • प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी : चुने हुए भाषण (2000)
  • वैल्यू, विज़न & वर्सेज ऑफ़ वाजपेयी : इंडिया मैन ऑफ़ डेस्टिनी (2001)
  • इंडिया’स फॉरेन पालिसी : न्यू डायमेंशन (1977)
  • असाम समस्या (1981)

और अधिक लेख –

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1 COMMENT

  1. atl ji ke vyktitv ke man se bhart ke hum logon ne unka labh nhe liya. 05 sal ka unhen ek bar aur moka milta to bhart ki halut our achhi hoti.

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