सम्राट पुष्यमित्र शुंग की जीवनी, इतिहास | Pushyamitra Shunga History in Hindi

Pushyamitra Shunga / पुष्यमित्र शुंग उत्तर भारत के शुंग साम्राज्य के संस्थापक और प्रथम राजा थे। इससे पहले वो मौर्य साम्राज्य में सेनापति थे। कहा जाता हैं वे जन्म से ब्राह्मण और कर्म से क्षत्रिय थे। मौर्य वंश के अन्तिम राजा बृहद्रथ ने उन्हें अपना सेनापति नियुक्त किया था। बृहद्रथ की हत्या करके Pushyamitra Shunga ने मौर्य राजगद्दी पर अपना अधिकार कर लिया और शुंग वंश की स्थापना की। 

सम्राट पुष्यमित्र शुंग की जीवनी, इतिहास | Pushyamitra Shunga History in Hindi,

महाभाष्य में पतञ्जलि और पाणिनि की अष्टाध्यायी के अनुसार पुष्यमित्र शुंग भारद्वाज गोत्र के ब्राह्मण थे। Pushyamitra Shunga ने 36 वर्षों तक राज्य किया था। क्योंकि मौर्य वंश के अंतिम राजा निर्बल थे और कई राज्य उनकी अधीनता से मुक्त हो चुके थे, ऐसे में पुष्यमित्र शुंग ने इन राज्यों को फिर से मगध की अधीनता स्वीकार करने के लिए विवश कर दिया। उसने अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त की और मगध साम्राज्य का फिर से विस्तार कर दिया।

शुंग वंश की स्थापना – Pushyamitra Shunga History & Story in Hindi

पुष्यमित्र शुंग मौर्य वंश को पराजित करने वाला तथा शुंग वंश का प्रवर्तक था। अत्यधिक हिंसा के बाद भारत की सनातन भूमि बौद्ध भिक्षुओं व बौद्ध मठों का गढ़ बन गई थी, जिसका संचालन अफगानिस्तान के बामियान और मगथ से होता था। मौर्य वंश का नौवां सम्राट वृहद्रथ मगध की गद्दी पर बैठा, तब उस समय तक आज का अफगानिस्तान, उत्तरी पाकिस्तान, कश्मीर, पंजाब और लगभग पूरा उत्तरी भारत बौद्ध बन चुका था। इसके अलावा भूटान, चीन, बर्मा, थाईलैंड आदि अनेक दूसरे राष्ट्र भी बौद्ध धर्म के झंडे तले आ चुके थे, लेकिन वृहद्रथ का शासन सिंधु के इस पार तक सिमटकर रह गया था। भारत में बस नाममात्र के ही राजा थे, जो हिन्दू राजा कहलाते थे। उनमें भी ज्यादातर दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और राजस्थान के राजा थे।

जब भारत के मगथ में नौवां बौद्ध शासक वृहद्रथ राज कर रहा था, तब ग्रीक राजा मीनेंडर अपने सहयोगी डेमेट्रियस (दिमित्र) के साथ युद्ध करता हुआ सिंधु नदी के पास तक पहुंच चुका था। सिंधु के पार उसने भारत पर आक्रमण करने की योजना बनाई। इस मीनेंडर या मिनिंदर को बौद्ध साहित्य में मिलिंद कहा जाता है। किंवदंति के अनुसार उसने सीमावर्ती इलाके के कुछ बौद्ध भिक्षुओं को अपने साथ मिला लिया। उसने कहा कि यदि आप भारत विजय में मेरा साथ देंगे तो मैं विजय के पश्चात बौद्ध धर्म अंगीकार कर लूंगा। हालांकि ‘मिलन्दपन्हो’ में मिलिन्द एवं बौद्ध भिक्षु नागसेन के मध्य सम्पन्न वाद-विवाद के परिणामस्वरूप मिलिन्द ने बगैर किसी शर्तों पर बौद्ध धर्म स्वीकार किया था।

इतिहास के एक दूसरे पहलु अनुसार बौद्ध भिक्षुओं का वेश धरकर मिनिंदर के सैनिक मठों में आकर रहने लगे। हजारों मठों में सैनिकों के साथ-साथ हथियार भी छुपा दिए गए। इस गति‍विधि की जानकारी बौद्ध सम्राट वृहद्रथ के सेनापति पुष्यमित्र शुंग को लगी।

पुष्यमित्र ने सम्राट वृहद्रथ से मठों की तलाशी की आज्ञा मांगी, परंतु बौद्ध सम्राट वृहद्रथ ने यह कहकर मना कर दिया कि तुम्हें व्यर्थ का संदेह है। लेकिन पुष्यमित्र शुंग ने राजाज्ञा का पालन किए बिना मठों की तलाशी ली और सभी भिक्षुओं को पकड़ लिया और भारी मात्रा में हथियार जब्त कर लिए, परंतु वृहद्रथ को आज्ञा का उल्लंघन अच्छा नहीं लगा।

कहते हैं कि पुष्यमित्र शुंग जब वापस राजधानी पहुंचा तब सम्राट वृहद्रथ सेना परेड लेकर जांच कर रहा था। उसी दौरान पुष्यमित्र शुंग और वृहद्रथ में कहासुनी हो गई। कहासुनी इतनी बढ़ी कि वृहद्रथ ने तलवार निकालकर पुष्यमित्र शुंग की हत्या करना चाही, लेकिन सेना को वृहद्रथ से ज्यादा पुष्यमित्र शुंग पर भरोसा था। सेना में बौद्ध भी होते थे और हिन्दू भी। पुष्यमित्र शुंग ने वृहद्रथ का वध कर दिया और फिर वह खुद सम्राट बन गया। इस दौरान सीमा पर मिलिंद ने आक्रमण कर दिया।

फिर पुष्यमित्र ने अपनी सेना का गठन किया और भारत के मध्य तक चढ़ आए मिनिंदर पर आक्रमण कर दिया। भारतीय सैनिकों के सामने ग्रीक सैनिकों की एक न चली। अंतत: पुष्‍यमित्र शुंग की सेना ने ग्रीक सेना का पीछा करते हुए उसे सिन्धु पार धकेल दिया।

पुष्यमित्र के राजा बन जाने पर मगध साम्राज्य को बहुत बल मिला। पुराणों के अनुसार पुष्यमित्र ने 36 वर्ष (185-149 ई.पू.) तक राज्य किया। हालांकि पुष्यमित्र शुंग के बाद 9 और शासक हुए- अग्निमित्र, वसुज्येष्ठ, वसुमित्र, अन्ध्रक, तीन अज्ञात शासक, भागवत, देवभूति है।

विजय अभियान

इतिहासकारों अनुसार पुष्यमित्र का शासनकाल चुनौतियों से भरा हुआ था। उस समय भारत पर कई विदेशी आक्रांताओं ने आक्रमण किए, जिनका सामना पुष्यमित्र शुंग को करना पड़ा। निर्बल मौर्य राजाओं के शासनकाल में जो अनेक प्रदेश साम्राज्य की अधीनता से स्वतंत्र हो गए थे, पुष्यमित्र ने उन्हें फिर से अपने अधीन कर लिया।

उस समय ‘विदर्भ’ (बरार) का शासक यज्ञसेन था। सम्भवतः वह मौर्यों की ओर से विदर्भ के शासक-पद पर नियुक्त हुआ था, पर मगध साम्राज्य की निर्बलता से लाभ उठाकर इस समय स्वतंत्र हो गया था। पुष्यमित्र के आदेश से अग्निमित्र ने उस पर आक्रमण किया, और उसे परास्त कर विदर्भ को फिर से मगध साम्राज्य के अधीन कर लिया।

मालविकाग्निमित्र के अनुसार भी पुष्यमित्र के यवनों के साथ युद्ध हुए थे, और उसके पोते वसुमित्र ने सिन्धु नदी के तट पर यवनों को परास्त किया था। जिस सिन्धु नदी के तट पर शुंग सेना द्वारा यवनों की पराजय हुई थी, वह कौन-सी है, इस विषय पर भी इतिहासकारों में मतभेद है।

विदर्भ को जीतकर और यवनों को परास्त कर पुष्यमित्र शुंग मगध साम्राज्य के विलुप्त गौरव का पुनरुत्थान करने में समर्थ हुआ था। उसके साम्राज्य की सीमा पश्चिम में सिन्धु नदी तक अवश्य थी। दिव्यावदान के अनुसार ‘साकल’ (सियालकोट) उसके साम्राज्य के अंतर्गत था। अयोध्या में प्राप्त उसके शिलालेख से इस बात में कोई सन्देह नहीं रह जाता कि मध्यदेश पर उसका शासन भली-भाँति स्थिर था। विदर्भ की विजय से उसके साम्राज्य की दक्षिणी सीमा नर्मदा नदी तक पहुँच गयी थी। साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र थी। इस प्रकार पुष्यमित्र का साम्राज्य हिमालय से नर्मदा नदी तक और सिन्धु से प्राच्य समुद्र तक विस्तृत था।


और अधिक लेख –

Please Note :- Pushyamitra Shunga Biography & Life History In Hindi मे दी गयी Information अच्छी लगी हो तो कृपया हमारा फ़ेसबुक (Facebook) पेज लाइक करे या कोई टिप्पणी (Comments) हो तो नीचे करे, धन्यवाद।

2 thoughts on “सम्राट पुष्यमित्र शुंग की जीवनी, इतिहास | Pushyamitra Shunga History in Hindi”

Leave a Comment

Your email address will not be published.