वैज्ञानिक नील्स बोर की जीवनी | Niels Bohr Biography In Hindi

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Niels Henrik David Bohr / नील्स हेनरिक डेविड बोर डेनमार्क के भौतिकविज्ञानी थे जिन्होने क्वांटम विचारों के आधार पर हाइड्रोजन परमाणु के स्पेक्ट्र्म की व्याख्या की। नाभिक के द्र्व – बूँद मॉडल के आधार प्र उन्होने नाभिकीय विखंडन का एक सिद्धांत प्रस्तुत किया। बोर ने क्वांटम – यांत्रिकी की संकल्पनात्मक समस्याओं को विशेषकर संपूरकता के सिद्धांत की प्रस्तुति द्वारा स्पष्ट करने में योगदान किया।

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नील्स बोर ने अणु की प्रकृति संबंधी बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारियां संसार को दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रॉन सामान्य तो आपने विनिश्चित वृतो में ही चक्कर काटते हैं किंतु जब अणु मे से विद्युत गुजारी जाती है तब ये अपनी लिक से हटकर कुछ बड़ी परिधि में पहुंच जाते हैं और पुनः वापस लौटते हैं। जिससे उनमें चमक पैदा होती है। नील्स की अणु कल्पना ने हमारी दुनिया ही बदल डाली थी। वो अणु शक्ति का प्रयोग विश्व शांति के लिए करने का समर्थन करते थे।

नील्स बोर का जन्म 7 अक्टूबर, 1885 को डेनमार्क में हुआ था। उनके पिता क्रिश्चन बोर, कोपेनहेगन विश्वविद्यालय में फिजियोलॉजी के प्रोफ़ेसर थे। नील्स बोर शुरू से ही एक प्रतिभाशाली विद्यार्थी थे और उन की संपूर्ण शिक्षा दीक्षा कोपनहेगन विश्वविद्यालय में हुई। 22 वर्ष की आयु में डेनिस विज्ञान सोसाइटी ने उन्हें ‘सर्फेस टेंशन’ संबंधी उनके मौलिक अध्ययनों पर एक स्वर्ण पदक भी दिया था।

नील्स बोर ने अपनी अणु कल्पना के आधार पर तथा कुछ क्वांटम सिद्धांत के आधार पर अणु की प्रकृति-संबंधी इस समस्या का समाधान उपस्थित करने की कोशिश की कि क्या सचमुच विभिन्न द्रव्यों द्वारा विसर्जित प्रकाश के वर्ण-रूपों की पूर्ण-कल्पना हम कुछ कर सकते हैं- इन वर्ण-रूपों के आधार पर क्या वस्तु के स्वरूप की कुछ कल्पना, कुछ पूर्वाभास, कर सकते हैं।? बोर ने एक नया विचार इस संबंध में इस प्रकार अभिव्यक्त किया कि यह इलेक्ट्रॉन सामान्यत: तो अपने विनिश्चय वृतों में ही चक्कर काटते हैं किंतु अब अणु में से बिजली गुजारी जाती है तब झट से कूदकर यह अपनी लिक में से ही अगली, और पहले से कुछ बड़ी, परिधि में पहुंच जाते हैं और वहां से फिर वापस- उसी पुरानी परिधि में आ जाते हैं। अर्थात परिधि-परिवर्तन की इस उछल-कूद का ही परिणाम होता है यह अद्भुत चमक-दमक जो एक प्रकार से अणु-अणु का एक और लक्षण-सा ही बन जाती है।

नील्स बोर को इस महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने के लिए 1922 में भौतिकविद का नोबेल पुरूस्कार दिया गया। 18 नवम्बर, 1962 को कोपेनहेगन, डेनमार्क में उनकी मृत्यु हो गई।


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