कवी नरोत्तमदास की जीवनी | Narottama Dasa Biography in Hindi

Narottama Dasa / नरोत्तमदास हिन्दी साहित्य के प्रमुख साहित्यकार थे। इनका एकमात्र खण्ड-काव्य ‘सुदामा चरित’ (ब्रजभाषा में) मिलता है जो हिन्दी साहित्य की अमूल्य धरोहर मानी जाती है। कवी नरोत्तमदास का जीवनकाल 1493 ई0 से 1582 ई0 के बीच माना गया है।

नरोत्तमदास का जीवन – Narottam Das History & Biography

हिन्दी साहित्य में ऐसे लोग बहुत कम ही हैं जिन्होंने मात्र एक या दो रचनाओं के आधार पर हिन्दी साहित्य में अपना स्थान सुनिश्चित किया है। इन्ही में एक थे नरोत्तमदास। नरोत्तमदास सीतापुर ज़िले के वाड़ी नामक कस्बे के रहने वाले थे। इनके जन्मकाल के सम्बन्ध में अनेक विद्वानों ने अपने-अपने मत प्रगट किए हैं परन्तु ‘शिव सिंह सेंगर’ व ‘जार्ज ग्रियर्सन’ के मत अधिक समीचीन व प्रमाणित प्रतीत होते है जिसके आधार पर सुदामा चरित का रचना काल सम्वत् 1582 में न होकर सन् 1582 अर्थात सम्वत् 1636 होता है।

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने ‘हिन्दी साहित्य’ में नरोत्तमदास के जन्म का उल्लेख सम्वत् 1545 में होना स्वीकार किया है। इस प्रकार अनेक विद्वानों के मतों के आधार पर इनके जीवनकाल का निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों के आलोक में 1493 ई0 से 1582 ई0 किया गया है।

नरोत्तमदास का ‘सुदामाचरित्र’ ग्रंथ बहुत प्रसिद्ध है। इसमें नरोत्तमदास ने सुदामा के घर की दरिद्रता का बहुत ही सुंदर वर्णन है। यद्यपि यह छोटा है, तथापि इसकी रचना बहुत ही सरस और हृदयग्राहिणी है और कवि की भावुकता का परिचय देती है। भाषा भी बहुत ही परिमार्जित और व्यवस्थित है। बहुतेरे कवियों के समान भरती के शब्द और वाक्य इसमें नहीं हैं। कुछ लोगों के अनुसार इन्होंने इसी प्रकार का एक और खंडकाव्य ‘ध्रुवचरित’ भी लिखा है। पर वह कहीं देखने में नहीं आया।

नरोत्तमदास वह विशिष्ट साहित्यकार हैं, जिन्होंने अपने काव्य में सबसे पहले ‘कवित्त’ (घनाक्षरी) और ‘सवैयों’ और का प्रयोग किया। यह विधा अकबर के समकालीन अन्य कवियों ने अपनायी थी। डॉ. रामकुमार वर्मा ने नरोत्तमदास के काव्य के संदर्भ में लिखा है कि ‘कथा संगठन,’ ‘नाटक यता’, भाव, भाषा आदि सभी ²ष्टियों से नरोत्तमदास कृत सुदामा चरित श्रेष्ठ रचना है।’


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