यहूदी धर्म की जानकारी, इतिहास, तथ्य – About Yahudi/Judaism In Hindi

Judaism / यहूदी धर्म इस्राइल और हिब्रूभाषियों का राजधर्म है और इसका पवित्र ग्रंथ तनख़ बाईबल का प्राचीन भाग माना जाता है। दुनिया के प्राचीन धर्मों में से एक यहूदी धर्म से ही ईसाई और इस्लाम धर्म की उत्पत्ति हुई है। मूर्ति पूजा को इस धर्म में पाप समझा जाता है। यह धर्म एकेश्वरवादी धर्म है, जो यह मानता है कि ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव मानव गतिविधियों और इतिहास द्वारा होता है। यह उपस्थिति कुछ मान्यताओं और मूल्यों की अभिव्यक्ति है, जो कर्म, सामाजिक व्यवस्था और संस्कृति में दृष्टिगोचर होती है।

यहूदी धर्म की जानकारी, इतिहास, तथ्य - About Yahudi/Judaism In Hindiयहूदी धर्म का इतिहास – Judaism History In Hindi

यहूदी धर्म की शुरुआत पैगंबर अब्राहम (अबराहम या इब्राहिम) से मानी जाती है, जो ईसा से 2000 वर्ष पूर्व हुए थे। पैगंबर अलै. अब्राहम के पहले बेटे का नाम हजरत इसहाक अलै. और दूसरे का नाम हजरत इस्माईल अलै. था। दोनों के पिता एक थे, किंतु माँ अलग-अलग थीं। हजरत इसहाक की माँ का नाम सराह था और हजरत इस्माईल की माँ हाजरा थीं।

पैगंबर अलै. अब्राहम के पोते का नाम हजरत अलै. याकूब था। याकूब का ही दूसरा नाम इजरायल था। याकूब ने ही यहूदियों की 12 जातियों को मिलाकर एक सम्मिलित राष्ट्र इजरायल बनाया था।

याकूब के एक बेटे का नाम यहूदा (जूदा) था। यहूदा के नाम पर ही उसके वंशज यहूदी कहलाए और उनका धर्म यहूदी धर्म कहलाया। हजरत अब्राहम को यहूदी, मुसलमान और ईसाई तीनों धर्मों के लोग अपना पितामह मानते हैं। आदम से अब्राहम और अब्राहम से मूसा तक यहूदी, ईसाई और इस्लाम सभी के पैगंबर एक ही है किंतु मूसा के बाद यहूदियों को अपने अगले पैंगबर के आने का अब भी इंतजार है।

यहोवा : यहूदी अपने ईश्वर को यहवेह या यहोवा कहते हैं। यहूदी मानते हैं कि सबसे पहले ये नाम ईश्वर ने हजरत मूसा को सुनाया था। ये शब्द ईसाईयों और यहूदियों के धर्मग्रंथ बाइबिल के पुराने नियम में कई बार आता है।

मूसा (मोजेस) : ईसा से लगभग 1,500 वर्ष पूर्व अबराहम के बाद यहूदी इतिहास में सबसे बड़ा नाम ‘पैगंबर मूसा’ का है। मूसा ही यहूदी जाति के प्रमुख व्यवस्थाकार हैं। मूसा को ही पहले से ही चली आ रही एक परम्परा को स्थापित करने के कारण यहूदी धर्म का संस्थापक माना जाता है।

दस आदेश : मूसा मिस्र के फराओ के जमाने में हुए थे। ऐसा माना जाता है कि उनको उनकी माँ ने नील नदी में बहा दिया था। उनको फिर फराओ की पत्नी ने पाला था। बड़े होकर वे मिस्री राजकुमार बने। बाद में मूसा को मालूम हुआ कि वे तो यहूदी हैं और उनका यहूदी राष्ट्र अत्याचार सह रहा है और यहाँ यहूदी गुलाम है तो उन्होंने यहूदियों को इकठ्ठाकर उनमें नई जागृति लाई।

मूसा को ईश्वर द्वारा दस आदेश मिले थे। मूसा का एक पहाड़ पर परमेश्वर से साक्षात्कार हुआ और परमेश्वर की मदद से उन्होंने फराओ को हराकर यहूदियों को आजाद कराया और मिस्र से पुन: उनकी भूमि इसराइल में यहूदियों को पहुँचाया। इसके बाद मूसा ने इसराइल में इस्राइलियों को ईश्वर द्वारा मिले ‘दस आदेश’ दिए जो आज भी यहूदी धर्म के प्रमुख सैद्धांतिक है।

सुलेमान : अब्राहम और मूसा के बाद दाऊद और उसके बेटे सुलेमान को यहूदी धर्म में अधिक आदरणीय माना जाता है। सुलेमान के समय दूसरे देशों के साथ इजरायल के व्यापार में खूब उन्नति हुई। सुलेमान का यदूदी जाति के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 37 वर्ष के योग्य शासन के बाद सन 937 ई.पू. में सुलेमान की मृत्यु हुई।

मिस्र पर कुछ समय तक यदुवंशियों का भी राज रहा था। वैसे इसका प्रचीन धर्म इजिप्ट था। ऐसा माना जाता है कि पहले यहूदी मिस्र के बहुदेववादी इजिप्ट धर्म के राजा फराओ के शासन के अधिन रहते थे। बाद में मूसा के नेतृत्व में वे इजरायल आ गए। बाद में मूसा के नेतृत्व में वे इजरायल आ गए। ईसा के 1100 साल पहले जैकब की 12 संतानों के आधार पर अलग-अलग यहूदी कबीले बने थे, जो दो गुटों में बँट गए। पहला 10 कबीलों का बना था वह इजरायल कहलाया और दूसरा जो बाकी के दो कबीलों से बना था वह जुडाया कहलाया। जुडाया पर बेबीलन का अधिकार हो गया। बाद में ई.पू. सन् 800 के आसपास यह असीरिया के अधीन चला गया।

असीरिया प्राचीन मेसोपोटामिया का एक साम्राज्य था, जो यह दजला नदी के उपरी हिस्से में बसा था। 10 कबीलों का क्या हुआ पता नहीं चला। फारस के हखामनी शासकों ने असीरियाइयों को ई.पू. 530 तक हरा दिया तो यह क्षेत्र फारसी शासन में आ गया। यूनानी विजेता सिकन्दर ने जब दारा तृतीय को ई.पू. 330 में हराया तो यहूदी लोग ग्रीक शासन में आ गए। सिकन्दर की मृत्यु के बाद सेल्यूकस के साम्राज्य और उसके बाद रोमन साम्राज्य के अधीन रहने के बाद ईसाईयत का उदय हुआ। इसके बाद यहूदियों को यातनाएँ दी जान लगी।

7वीं सदी में इस्लाम के आगाज के बाद यहूदियों की मुश्किलें और बड़ गई। तुर्क और मामलुक शासन के समय यहूदियों को इजराइल से पलायन करना पड़ा। अंतत: यहूदियों के हाथ से अपना राष्ट्र जाता रहा। मई 1948 में इजराइल को फिर से यहूदियों का स्वतंत्र राष्ट्र बनाया गया। दुनिया भर में इधर-उधर बिखरे यहूदी आकर इजरायली क्षेत्रों में बसने लगे। वर्तमान में अरबों और फिलिस्तिनियों के साथ कई युद्धों में उलझा हुआ है एकमात्र यहूदी राष्ट्र इजरायल।

भारत में यहूदी धर्म आज से 2985 वर्ष पूर्व अर्थात 973 ईसा पूर्व में यहूदियों ने केरल के मालाबार तट पर प्रवेश किया। यहूदी कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्य में बस गए। विद्वानों के अनुसार 586 ईसा पूर्व में जूडिया की बेबीलोन विजय के तत्काल पश्चात कुछ यहूदी सर्वप्रथम क्रेंगनोर में बसे।

धर्मग्रंथ – Judaism Holy Book in Hindi

यहूदियों के बीच अनेक धर्मग्रंथ प्रचलित हैं, जिसमें कुछ प्रमुख हैं-

  1. तोरा, जो बाइबिल के प्रथम पाँच ग्रंथों का सामूहिक नाम है और यहूदी लोग इसे सीधे ईश्वर द्वारा मूसा को प्रदान की गई थी।
  2. तालमुड, जो यहूदियों के मौखिक आचार व दैनिक व्यहार संबंधी नियमों, टीकाओं तथा व्याख्याओं का संकलन है।
  3. इलाका, जो तालमुड का विधि संग्रह है।
  4. अगाडा, जिसमें धर्मकार्य, धर्मकथाएं, किस्से आदि संग्रहीत हैं।
  5. तनाका, जो बाइबिल का हिब्रू नाम है, आदि।

यहूदियों के दस धर्म सूत्र – Judaism 10 Commandments

यहूदी धर्म में 10 धर्माचरणों का विशेष महत्त्व है, जिनका पालन करने पर यहोवा की अनुपम कृपा प्राप्त होती है। ये दस धर्म सूत्र निम्न हैं-

  1. मैं स्वामी हूँ तेरा ईश्वर, तुझे मिस्त्र की दासता से मुक्त कराने वाला।
  2. मेरे सिवा तू किसी दूसरे देवता को नहीं मानेगा।
  3. तू अपने स्वामी और अपने प्रभु का नाम व्यर्थ ही न लेगा।
  4. सबाथ (अवकाश) का दिन सदैव याद रखना और उसे पवित्र रखना। छ: दिन तू काम करेगा, अपने सब काम, किन्तु सातवाँ दिन सबाथ का दिन है। याद रखना कि छ: दिन तक तेरे प्रभु ने आकाश, पृथ्वी और सागर तथा उन सबमें विद्यमान सभी कुछ की रचना की, फिर सातवें दिन विश्राम किया था। अत: यह प्रभु के विश्राम का दिन है। इस दिन तू कोई भी काम नहीं कर सकता।
  5. अपने माता-पिता का सम्मान कर, उन्हें आदर दे ताकि प्रभु प्रदत्त इस भूमि पर तू दीर्घायु हो सके।
  6. तू हत्या नहीं करेगा।
  7. तू परस्त्री, परपुरुष गमन नहीं करेगा।
  8. तू चोरी नहीं करेगा।
  9. तू अपने पड़ोसी के ख़िलाफ़ झूठी गवाही नहीं देगा।
  10. तू अपने पड़ोसी के मकान, पड़ोसी की पत्नी, पड़ोसी के नौकर या नौकरानी, उसके बैल, उसके गधे पर बुरी नज़र नहीं रखेगा।

यरुशलम – Jerusalem in Hindi

येरुशलम इसराइल देश की विवादित राजधानी है। इस पर यहूदी धर्म, ईसाई धर्म और इस्लाम धर्म, तीनों ही दावा करते हैं, क्योंकि यहीं यहूदियों का पवित्र सुलैमानी मन्दिर हुआ करता था, जो अब एक दीवार मात्र है। यही शहर ईसा मसीह की कर्मभूमि रहा है। यहीं से हजरत मुहम्मद स्वर्ग गए थे। इसीलिए यह विवाद का केंद्र है। लेकिन असल में येरुशलम प्राचीन यहूदी राज्य का केंद्र और राजधानी रहा है। यही पर मूसा ने यहूदियों को धर्म की शिक्षा दी थी।


और अधिक लेख –

Please Note :  Judaism History & Story In Hindi मे दी गयी Information अच्छी लगी हो तो कृपया हमारा फ़ेसबुक (Facebook) पेज लाइक करे या कोई टिप्पणी (Comments) हो तो नीचे  Comment Box मे करे। Yahudi Dharm Ka Itihas In Hindi व नयी पोस्ट डाइरेक्ट ईमेल मे पाने के लिए Free Email Subscribe करे, धन्यवाद।

4 thoughts on “यहूदी धर्म की जानकारी, इतिहास, तथ्य – About Yahudi/Judaism In Hindi”

  1. रविन्द्र बागडे

    अच्छी जानकारी
    यहूदी का इतिहास हिन्दी मे
    इमेलद्वारा भेज दीजिये

    1. हेलो रविन्द्र बागडे सर, ईमेल में पाने के लिए आपको ये बताना होगा की आप इसे किस उद्देश्य के लिए लेना चाह रहे हैं। धन्यवाद

  2. Sir यरूशलेम के मन्दिर का पूरा इतिहास बताइए कि किस ने इसे बनाया और किसने इसे नष्ट क्यू किया व कब किया

Leave a Comment

Your email address will not be published.