हेनरी कैवेंडिश की जीवनी | Henry Cavendish Biography In Hindi

Henry Cavendish / हेनरी कैवेंडिश एक ब्रिटिश प्राकृतिक दार्शनिक, वैज्ञानिक, और एक महत्वपूर्ण प्रायोगिक और सैद्धांतिक रसायनज्ञ और भौतिक विज्ञानी थे। उन्होंने न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांतों का उपयोग करके पूरी पृथ्वी का भार भी नाप-तोलकर रख दिया था।

हेनरी कैवेंडिश की जीवनी | Henry Cavendish Biography In Hindiहेनरी कैवेंडिश की जीवनी – Henry Cavendish Biography In Hindi

हेनरी कैवेंडिश का जन्म फ्रांस के नीस शहर में 10 अक्टूबर, 1731 को हुआ था। वे लार्ड चार्ली तथा लेडी एन. कैवेंडिश के दो पुत्रों में पहली संतान थे। हेनरी के पिता लार्ड चार्ली एक महान वैज्ञानिक थे जिसे मैक्सिमम-मिनिमम थर्मामीटर का आविष्कार की बदौलत लंदन के रॉयल सोसाइटी की ओर से कप्ले मेडल मिल चुका था। बचपन में ही कैवेंडिश की माता  का निधन हो गई थी।

11 साल की उम्र में, हेनरी ने लंदन के पास एक निजी स्कूल, हैकनी अकादमी में प्रवेश लिया। 18 साल की उम्र में वह, सेंट पीटर कॉलेज में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में दाखिल लिया, उस समय पेतेर्होउस के नाम से जाना जाता है, हिंदी और उनके भाई फ्रेडरिक, गणित और भौतिक के अध्ययन के लिए लंदन और उसके बाद पेरिस निकल गए। पढाई पूरी करने के बाद बाद वह लंदन में अपने पिता के साथ रहते थे, जहां उन्होंने जल्द ही अपना प्रयोगशाला बना लिया था।

कैवेंडिश ने सर्वप्रथम अपनी निजी प्रयोगशाला में फ्लॉजिस्टन पर परिक्षण किया था। उन्होंने लोहे, जस्ते, और टिन के टुकड़े लेकर उन्होंने सल्फ्यूरिक एसिड वाले बर्तन में लोहे के टुकडे डाले तो वहां से बुलबुले उठ-उठकर ऊपर की ओर आने लगे और ऊपर इन बुलबुलों को एक किस्म के गुब्बारों में भर लेने की व्यवस्था थी। ये गुब्बारे भरे गए। एक में लोहे और गंधक के तेजाब के, दूसरे में जस्ते और गंधक के तेजाब के, तीसरे में टीन और गंधक के तेजाब के बुलबुले थे। और बाकी तीन में उसी प्रकार हायड्रोक्लोरिक एसिड में छोड़ गए लोहे, जस्ते और टिन की प्रतिक्रिया से उत्पन्न गैस के बुलबुले थे।

1784 में कैवेंडिश ने अपने इन वायु-संबंधी परीक्षणों को रॉयल सोसाइटी के सम्मुख प्रकाशित किया। इतने अध्यवसाय के परिणाम बहुत ही आश्चर्यकारी थे – फ्लॉजिस्टन – जब फ्लॉजिस्टन-रहित हवा ऑक्सीजन के साथ मिलती है तो पानी की उत्पत्ति होती है ।और परीक्षणों की गणनाओ से उसे यह सबूत भी मिल चुका था कि हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के 2.1 अनुपात में मिलने पर ही यह पानी पैदा होता है। कितने ही विपुल परिमाण में ही कैवेंडिश ने दोनों गैसों को मिलाकर दोनों के मूल परिणामों के तुल्य परिणाम में ही पानी पैदा करके दिखाया। कैवेंडिश ने परीक्षणों द्वारा सिद्ध कर दिया कि जल, एक तत्व न होकर, दो वर्ण-हिन् गैसों का एक मिश्रण है।

इन परीक्षणों में कैवेंडिश ने यह भी जान लिया कि जो हवा हम साँस में अंदर ले जाते उसका 20% ऑक्सीजन हैं। हाइड्रोजन और हवा के धमाके का सूक्ष्म अध्ययन करके ही वे इस नतीजे पर पहुंचे थे। कैवेंडिश ने देखा कि बिजली के स्पार्किंग के द्वारा हाइड्रोजन से मिली हवा जब फैलती है तो कुछ अम्ल भी उससे पैदा हो जाता है। विश्लेषण किया गया और पता चला यह वायुमंडल में विघमान नाइट्रोजन के कारण हैं, विद्युत का स्पार्किंग नाइट्रोजन और ऑक्सीजन को भी मिला सकता है। प्रकृति में जो खाद बनती है वही इसी जरिए से ही पैदा होती है। आकाश से जब बिजली गिरती है तो वर्षा के साथ नाइट्रोजन आक्सीजन के साथ मिलकर, खाद के रूप में पृथ्वी को उपहार-रूप में मिल जाती है। कैवेंडिश ने परीक्षण कर-करके के शायद वायुमंडल की गैसों को, बून्द-बून्द निचोड़ते हुए, अलग कर लिया था। बिजली की चिंगारी पर चिंगारिया- और ऑक्सीजन पर ऑक्सीजन छोड़ते चलो की हवा में नाइट्रोजन बाकी रह ही ना जाए। किंतु ‘हवा’ का एक बुलबुला-सा अब भी उसमें कहीं रह गया था- यही था ‘आर्गन’ –  जिसकी गणना ‘विरल’ गैसों में होती है, और जिसकी मात्रा हमारे वातावरण में 1% से भी कुछ कम ही है।

कैवेंडिश हमेशा अपने ही विचार में डूबे रहते थे, फिर भी वे वायुमंडलीय हवा की संरचना में अपने शोध, विभिन्न गैसों के गुण, पानी के संश्लेषण, बिजली का आकर्षण और प्रतिकर्षण नियन्त्रक नियम, ऊष्मा का एक यांत्रिक सिद्धांत, और पृथ्वी की घनत्व की गणना (और इसी कारण पदार्थ भी) में काफी सटीकता और परिशुद्धता के लिए प्रतिष्ठित थे। पृथ्वी के घनत्व को मापने के लिए उनका प्रयोग, ‘कैवेंडिश प्रयोग’ के नाम से जाना गया। 24 फ़रवरी 1810 को 78 की उम्र में लन्दन में उनका निधन हो गया। वे जीवन भर अविवाहित ही रहे थे।


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