गुड फ़्राइडे का इतिहास और जानकारी Good Friday Information in Hindi

Good Friday Information & History – गुड फ़्राइडे ईसाई धर्म के लोगों द्वारा ईसा मसीह को सलीब पर चढ़ाने के कारण हुई मृत्यु के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन को गुड फ़्राइडे, होली फ़्राइडे (Holy Friday), ब्लैक फ़्राइडे (Black Friday) और ग्रेट फ़्राइडे (Great Friday) के नाम से भी जाना जाता हैं। इस दिन जीवनभर लोगों में प्रेम और विश्वास जगाने वाले प्रभु यीशु को याद किया जाता है और उनके उपदेशों को सुनाया जाता है।

गुड फ़्राइडे का इतिहास और जानकारी Good Friday Information in Hindiगुड फ़्राइडे की जानकारी – Good Friday in Hindi

गुड फ्राइडे (Good Friday) के दिन श्रद्धालु प्रेम, सत्य और विश्वास की डगर पर चलने का प्रण लेते हैं। कई जगह लोग इस दिन काले कपड़े पहनकर शोक व्यक्त करते हैं। यह त्यौहार पवित्र सप्ताह के दौरान मनाया जाता है। गुड फ्राइडे का पर्व ईस्टर सन्डे से पहले आने वाले शुक्रवार को आता है और इसका पालन पाश्कल ट्रीडम के अंश के तौर पर किया जाता है। इस फेस्टिवल को आठवी सदी मे, एक विद्वान सेंट बीड के द्वारा, प्रारंभ किया गया था। जिसमे अपने भगवान यीशु मसीह के, दोबारा जिन्दा होने पर उसी ख़ुशी के रूप मे मनाया जाता है।

गुड फ़्राइडे का इतिहास – Good Friday History in Hindi

आज से करीब दो हज़ार साल पहले धर्म और जाति के नाम जब धरती पर मनुष्य पथभ्रष्ट होने लगा, हिंसा, आतंक, भ्रष्टाचार, अत्याचार और अंधविश्वास बढ़ गया तब परमेश्वर ने शांति और प्रेम के लिए यीशु को अपने पुत्र के रूप धरती पर भेजा। यीशु मसीह का जन्म ‘पलिस्तीन’ यानी इजराइल के एक गांव बैतलहम में अलौकिक शक्ति से मरियम के माध्यम से हुआ।

उस वक़्त यीशु मसीह की माता मरियम और यूसुफ़ यानी यीशु के पिता की मंगनी ही हुई थी। दोनों के संयोग से पहले ही मरियम के गर्भवती होने की वजह से यूसूफ ने उन्हें त्यागने का मन बना लिया, लेकिन प्रभु के स्वर्गदूत ने यूसूफ को स्वप्न में मरियम के गर्भ में पवित्र आत्म के होने और उसकी रक्षा करने का आदेश दिया।

यूसुफ ने प्रभु की आज्ञा मानी और जन्म के बाद बालक का नाम “यीशु” रखा। बालक यीशु को वहां के तत्कालीन राजा ‘हेरोदेस’ ने मरवाने की हर संभव प्रयास किया, लेकिन इससे पहले ही यूसूफ प्रभु के दूत के आदेश के पर मरियम और यीशु को लेकर मिस्र चले गये और राजा हेरोदेस के मरने तक मिस्र में रहे। फिर पुन: स्वप्न में चेतावनी पाकर गलील देश में चले गए और नासरत नाम के नगर में जा बसे।

यीशु जब बड़े हुवे तो, जगह-जगह जाकर लोगों को मानवता और शांति का संदेश देने लगे। उन्होंने धर्म के नाम पर अंधविश्वास फैलाने वाले फरीसियों यानी धर्मपंडितों को मानवजाति का शत्रु कहा। उनके संदेशों से परेशान होकर धर्मपंडितों ने उन्हें धर्म की अवमानना का आरोप लगाकर उन्हें मौत की सज़ा दी। उनपर आरोप लगाए गए थे कि वह पाखंड कर रहे हैं और खुद को ईश्वर का पुत्र बता रहे हैं।

इसके बाद यीशु मसीह को कई तरह की यातनाएं दी गयीं। उनका मजाक उड़ाया गया। उनके कपड़े उतारकर लाल चोंगा पहनाया गया। कांटों का ताज उनके सिर पर रखा गया। इतना ही नहीं यीशु के मुंह पर थूका गया और उनके सर पर सरकण्डों से प्रहार किये गये। इसके बाद यीशु क्रूस को अपने कंधे पर उठाकर ‘गोल गोथा’ नामक जगह ले गये। जहां उन्हें दिन के बारह बजे दो अन्य डाकूओं के साथ एक को दाहिनी और दूसरा को बाई तरफ क्रूसों पर चढ़ा दिया गया।

जिस दिन यीशु को सूली पर चढ़ाया गया वह दिन शुक्रवार था। बाइबिल के अनुसार तीन घंटे बाद यीशु ने ऊंची आवाज़ में परमेश्वर को पुकारा ‘हे पिता मैं अपनी आत्मा को तेरे हाथों सौंपता हूं,’ इतना कहकर उन्होंने अपना प्राण त्याग दिया। मानवता के लिए बलिदान का वो दिन गुडफ़्राइडे था। ईसाई धर्म के अनुयायी यीशु को उनके त्याग के लिए याद करते हैं।

मौत के बाद यीशु को क़ब्र में दफना दिया गया, हैरानी तो तब हुई जब तीन दिन बाद यानी रविवार को यीशु जीवित हो उठे। कहते हैं पुन: जीवित होने के बाद यीशु चालीस दिन तक अपने शिष्यों और मित्रों के साथ रहे और अंत में स्वर्ग चले गये। इस दिन गिरजाघरों में ईसाई धर्म को मनाने वाले लोग सभी को ईसा मसीह की तरह इंसान से प्रेम और उनके अपराधों को माफ करने का संदेश देते हैं।

गुड फ्राइडे कैसे मनाया जाता है – Good Friday Kaise Manaya Jata Hai

रोमन कैथोलिक चर्च गुड फ़्राइडे को उपवास दिवस के तौर पर मानता है, जबकि चर्च के लैटिन संस्कारों के अनुसार एक बार हलकी भोजन और उसमे मांस के बदले मछली खायी जाती है और दो कलेवा यानी अल्पाहार लिया जाता है। यह त्यौहार पवित्र सप्ताह के दौरान मनाया जाता है, जो ईस्टर सन्डे से पहले पड़ने वाले शुक्रवार को आता है। इस मौक़े पर चर्च को सजाया जाता है और पर्व की शुरुआत बाइबिल के पाठ से की जाती है। इसके बाद पवित्र क्रूस यात्रा शुरू होती है। फिर वापस चर्च आकर खत्म होती है। इसके बाद प्रभु के बलिदान को याद किया जाता है।

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