‘ईद’ पर निबंध (2020) | Essay On Eid In Hindi – Eid al-Fitr

'ईद' पर निबंध | Essay On Eid In Hindi - Eid al-Fitrईद अथवा ‘ईद-उल-फितर’ पर निबंध – Essay On Eid in Hindi – Eid Par Nibandh

विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ पर अनेक धर्मो के लोग एक साथ निवास करते हैं। जिस प्रकार हिन्दुओं के प्रसिद्ध त्योहार दीवाली, होली, जन्माष्टमी हैं, उसी प्रकार मुसलमानों के दो प्रसिद्ध त्योहार हैं जिनमें से एक को ईद अथवा ‘ईद-उल-फितर’ कहा जाता है तथा दूसरे को ईदुज्जुहा अथवा बकरईद कहा जाता है।

‘ईद’ मुसलमानों के सबसे बड़े त्यौहारों में से एक है। ‘ईद’ का त्योहार इस्लामी माह शव्वाल की पहली तारीख को मनाया जाता है। इसके पहले रमजान का महीना होता है जिसे मुसलमान भाई बड़ा पवित्र महीना मानते हैं। इस पूरे माह रोजे (उपवास) रखते हैं। सूर्योदय से सूर्यास्त तक कुछ भी नहीं खाते। सूर्यास्त पश्चात रोजा (उपवास) खोला जाता है जिसे ‘रोजा-इफ्तारी’ कहते हैं। दिनभर ‘कुरान शरीफ’ का पाठ करते हैं और नियमपूर्वक नमाज अदा करते हैं। पूरा माह पवित्र जीवन बिताते हैं, गरीबों और दुखियों की मदद करते हैं।

रमजान माह की समाप्ति पर ईद का चांद देखकर रोजा समाप्त करते हैं। रोजों के बाद दिखाई देने वाला ‘प्रथम चांद’ ईद का चांद कहलाता है। यह मुसलमानों के लिए बड़ा प्यारा चांद होता है। इसके दूसरे दिन ईद मनाया जाता हैं।

ईद का त्यौहार मनाने की तैयारी पहले से ही आरम्भ कर दी जाती है। बच्चे, युवा, वृद्ध सभी उत्साहित दिखाई देते हैं। बाज़ारों में भीड़ बढ़ जाती है। अमीर-गरीब सभी नए वस्त्र, जूते-चप्पल, उपहार आदि खरीदने में व्यस्त हो जाते हैं।

ईद के दिन सुबह से ही बच्चे, युवा, वृद्ध सभी विशेष प्रकार के वस्त्र पहनकर, सर पर टोपी लगाकर ईदगाह में जमा होने लगते हैं। वहाँ सभी पंक्तिबद्ध होकर विशेष नमाज़ अदा करते हैं। देश की सभी प्रमुख मस्जिदों में भी ऐसा ही दृश्य देखा जा सकता है। सभी आपसी भेद-भाव भूलकर गले मिलते हैं और एक-दूसरे को ईद की बधाई देते हैं।

ईद के दिन मुसलमानों के घर मीठी सेवईं बनती है। इसके अतिरिक्त अनेक प्रकार के व्यंजन भी तैयार किये जाते हैं। लोग अपने सगे सम्बन्धियों के घर जाकर उन्हें ईद की मुबारकबाद देते हैं। रात में मस्जिदों पर रोशनी की जाती है।

ईद आपसी मिलन और भाई-चारे का त्यौहार है। इस दिन हमें आपस में भेदभाव भुलाकर मिल-जुलकर त्योहार मनाना चाहिए। सभी तरह के राग-द्वेष भूलकर भाईचारे की भावना से मनाए गए त्योहारों की अपनी अलग ही शान होती है, क्योंकि त्योहार हमें ताजगी, स्फूर्ति और खुशियां प्रदान करते हैं।


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