कफ ‘बलगम’-खांसी का कारण और घरेलु इलाज Cough Khansi Treatment in Hindi

Cough Khansi / कफ(बलगम) – खांसी एक सामान्‍य बीमारी है, लेकिन यह तकलीफ बहुत देती है। इसे ट्यूसिस (Tussis) के नाम से भी जाना जाता है। कफ-खांसी किसी को कभी भी हो सकती है। मौसम में जरा से बदलाव से हमारे शरीर में सबसे पहले असर होता है, और सर्दी-खासी हो जाती हैं। खांसी चाहे जैसी भी हो, सूखी हो, काली खांसी हो, बलगम वाली हो, इसके लिए अपनाये ये घरेलु नुस्खे (khansi ke gharelu upay) …  

कफ(बलगम)-खांसी का कारण और घरेलु इलाज Cough Khansi Treatment in Hindiकफ-खांसी होने के कारण – Cough Causes in Hindi

खांसी अचानक से मनुष्यों पर असर करने वाला एक रिफ्लेक्स है। यह एक ऐसी चीज है जिसमें आपके गले या वायुमार्ग में परेशानी होती है जिस कारण आपके मस्तिष्क को संदेश भेजती है। इसका उद्देश्य बाहरी सूक्ष्मजीवों, रोगाणुओं, जलन, तरल पदार्थ और बलगम को हमारे श्वसन नली और गले में से साफ करना होता है। ये फेफेड़ों से हवा का तेज़ी से निष्कासन करती है।

खांसी जानबूझकर या बिना इच्छा के हो सकती है। कभी-कभी, खांसी बहुत जोरदार हो सकती है। हालांकि खांसी एक गंभीर बीमारी का संकेत भी है। लंबे समय तक, जोरदार खांसी के कारण थकावट, जागते रहना, सिरदर्द, पेट की समस्या और यहां तक कि पसलियां के टूटने का कारण भी हो सकता है। खांसी होने के और भी कई कारण हैं, जैसे –

  • ठंड अथवा किसी संक्रमण के कारण हो सकती हैं खांसी।
  • धूल मिटटी के संपर्क में ज्यादा रहने से भी खांसी होती हैं।
  • किसी बड़ी बीमारी का होना जैसे TB, अस्थमा, फेफड़ों में कैंसर
  • खांसी रोग गलत तरीके के खान-पान के कारण, दूषित भोजन तथा भोजन में फलों और सब्जियों की कमी होने के कारण हो सकता है।
  • अधिक धूम्रपान तथा शराब का सेवन करने के कारण भी खांसी हो सकती है।
  • मीठी चीजों को खाने के कारण भी खांसी हो सकती है।
  • कफ (बलगम) हमारे गले व फेफड़ों में जमने वाली एक श्लेष्मा होती है जो खांसी या खांसने के साथ बाहर आता है।

खांसी के प्रकार – Types of Cough in Hindi

  • जिस खांसी के साथ कफ निकलता है उसे तर खांसी कहते हैं तथा जिस खांसी में कफ नहीं निकलता है उसे सूखी-खांसी कहते हैं या कुक्कर खांसी भी कहते हैं। यदि खांसी लगातार होती रहती है तो खांसते समय रोगी को सीने में दर्द मालूम होता है तथा यह रोग एक सप्ताह से अधिक टिके तो समझना चाहिए कि रोगी को कास रोग शुरू हो रहा है।
  • खांसी का ही दूसरा रूप कुकुर खांसी है जो अधिकतर बच्चों को होती है। कुकुर खांसी रोग के कारण रोगी व्यक्ति खांसता तो है लेकिन खांसी के साथ दूषित द्रव्य बाहर नहीं निकलता है। इस रोग में रोगी के मुंह और नाक से लार टपकती है। यह खांसी कई दिनों तक रहती है तथा बहुत अधिक परेशान करती है।
  • इसके आलावा तेज खांसी यह थोड़े समय के लिए, तथा या ज्यादातर ऊपरी श्वासनली के संक्रमण के कारण होती है। यह फ्लू या कॉमन कोल्ड के कारण होती है। और पुरानी खांसी 6-8 सप्ताह तक रह सकती है। यह Allergic rhinitis, T.B. या Lung cancer और Lung infection के कारण होती है।

खांसी के लक्षण – Cough Symptoms in Hindi 

सामान्यत बंद नाक या नाक बहना, गले में खराश होना, आवाज़ बैठना, घरघराहट और सांस की तकलीफ, गले के पीछे तरल पदार्थ का एहसास होना(पोस्टनेज़ल ड्रिप) आदि लक्षण होते हैं।

कफ खांसी ठीक करने के घरेलु नुस्खे – Cough Treatment at Home in Hindi

नमक मिले अदरक की चटनी अथवा उसके टुकड़ों को मुंह में डालकर चूसते रहने से कफ और खांसी में जल्दी आराम मिलता है।

हींग, त्रिफला, मुलेठी और मिश्री को नींबू के रस में मिलाकर चाटने से भी खांसी में फायदा मिलता है।

अदरक के रस को शहद में मिलाकर चाटने से कफ खांसी में तत्काल आराम मिलता है। इससे दमा भी ठीक हो जाता है।

कफ-खांसी में छोटी पीपली को घिस कर उसे शहद के साथ रोगी को चटाये जल्दी आराम मिलेगा।

गिलोय के 2 ग्राम सत को शहद में मिलाकर देने से कफ खांसी ठीक हो जाते हैं।

अजवायन के चूर्ण की फंकी लेने से पुरानी खांसी और कफ दूर होता है। साथ ही स्वास्थ रोग का विनाश होता है।

बच्चों को खांसी होने पर धनिए को चावल के माड़ में घोटकर पिलाने से जल्दी लाभ मिलता है।

बच्चों की खांसी में फूला हुआ सुहागा 2-3 रत्ती की मात्रा में दूध या शहद के साथ देने से तत्काल आराम मिलता है। इसमें मां का दूध सर्वश्रेष्ठ होता है।

काली खांसी में एक से चार रत्ती तक शोधित हींग चाटने से तत्काल आराम मिलता है।

लौंग को ठन्डे पानी में पीसकर-छानकर मिश्री मिलाए। फिर उसे आग पर तपाकर या भूनकर शहद के साथ चाटना चाहिए। इससे खासी में फौरन आराम मिलता है।

तुलसी के पत्ते, पान के साथ चूसने से खांसी दूर हो जाती है। इसे अदरक के साथ भी ले सकते हैं। बड़ो के लिए 10 पत्ते और बच्चों के लिए पांच पत्ते पर्याप्त होते हैं। तुलसी का प्रयोग हर रोग में किया जा सकता है। इसे प्रयोग में लाने से पहले उसकी बारीक़ चटनी बना लेनी चाहिए।

छोटी पीपली और तेजपात के पत्तों का चूर्ण बनाकर रख ले। खांसी जुकाम होने पर इसकी एक ग्राम मात्रा शहद के साथ चाटने पर आराम मिलता है।

दालचीनी, सौंप, मुलहटी और मुनक्का को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण कर लें तथा उसकी छोटी छोटी गोलियां बनाएं। सुबह दोपहर शाम को उन गोलियों को चूसने से पुरानी खांसी नहीं उठेगी।

फिटकरी भूनकर बारीक़ कर ले। एक रत्ती भुनी फिटकिरी में थोड़ी सी चीनी मिलाकर दिन में दो बार खाए। 5 दिन में काली खांसी ठीक हो जाएगी। बड़ा आदमी दो रत्ती तक ले सकता है।

पुरानी खांसी को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को 3 दिनों तक फलों का रस पीना चाहिए और उपवास रखना चाहिए तथा इसके बाद 10 दिनों तक फलों का सेवन करना चाहिए और जब तक कब्ज की समस्या दूर न हो तब तक एनिमा क्रिया लेकर पेट को साफ करना चाहिए।

पीपल के नरम पत्ते 24 ग्राम, मुलहटी 20 ग्राम, एवं बुरा 20 ग्राम इन सबको मिलाकर मटर के दाने के बराबर गोलिया बना ले। 2 दिन में तीन बार ले। हर प्रकार की खांसी में आराम मिलेगा

आधा शुद्ध किया भिलावाँ, गाय के दूध के साथ औटाकर पीने से कफ- नजले की शिकायत दूर हो जाती है।

मेहंदी के पत्तों के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर चाटने से खांसी में लाभ होता है।

एक गिलास पानी में दो चम्मच मेथी के दाने डालकर उबालें। जब चौथाई पानी रह जाए तो उसमें चार चम्मच शहद मिलाकर पीने से कफ और खांसी में तत्काल आराम मिलता है।

सूखी खांसी में काली मिर्च चूसने से तुरंत लाभ पहुंचता है। यदि कफ खांसी हो तो काली मिर्च का प्रयोग पानी में उबालकर करें।

तुलसी के पत्तों के साथ पीसकर शहद के साथ चाटने से कफ खांसी जड़ से समाप्त हो जाती है।

जिन्हें कफ-खांसी की शिकायत रहती हो उन्हें गाजर के रस में मिश्री एवं काली मिर्च मिलाकर सेवन करना चाहिए।

15 नग काली मिर्च सिल पर पीस ले। एक कटोरी में 5 चम्मच शक्कर डालकर थोड़ा पानी डाल दें और उसमें काली मिर्च का पिसा चूर्ण डाल कर पकाए। जब वह शहद की तरह गाढ़ा हो जाए तो उतार का ढक दे। रोज दो-दो घंटे के बाद आधा आधा चम्मच लेकर चांटे और उबालकर पानी पिए। सूखी खांसी अथवा गीली खांसी दोनों में यह नुस्खा लाभदायक है।

तुलसी के पत्ते 5 काली मिर्च, 5 नग काला मनुक्का, 5 ग्राम चोकर (गेहूं के आटे का छान), 6 ग्राम मुलहठी, 3 ग्राम बनफशा के फूल लेकर 200 ग्राम पानी में उबाल लीजिए। जब पानी आधा हो जाए तो उसे ठंडा करके छान लीजिए। फिर गर्म करें और बताशे डालकर रात को सोते समय गरम-गरम पी लीजिए। इस खुराक को 3-4 दिन तक लेने से खांसी ठीक हो जाती है।

फिटकरी को पीसकर लोहे की कड़ाही में या तवे पर रखकर आग पर चढ़ा दे। फूलकर पानी हो जाएगी। जब सब फिटकरी पानी होकर नीचे की तरफ से खुश्क होने लगे तब उसी समय आंच तनिक कम करके किसी छुरी आदि से उल्टा दे। अब फिर दोबारा आंच थोड़ी तेज करे तांकि इस तरफ भी नीचे से खुश्क होने लगे। फिर इस खुश्क फूली फिटकरी का चूर्ण बनाकर रख ले। इस तरह फिटकरी का कई रोगो में सफलतापूर्वक बिना किसी हानि के में व्यवहार में लायी जाती हैं।

मुलेठी का चाय पीने से भी सूखी खांसी में आराम मिलता है। इसे बनाने के लिए, दो बड़ी चम्मच मुलैठी की सूखी जड़ को एक मग में रखें और इस मग में उबलता हुआ पानी डालें। 10-15 मिनट तक भाप लगने दे। दिन में दो बार इसे लें।

सावधानियां

लगातार खांसी हो रही हो तो यह कोई बढे बीमारी के लक्षण भी हो सकते हैं। सात दिनों या जब आपको उच्च बुखार, त्वचा लाल रैश, मस्तिष्क दर्द के साथ आगे बढ़ना या खांसी के साथ गले में खराश होने पर आपकी खांसी में सुधार नहीं हुआ है, तो अपने विशेषज्ञ से जांच करें। कोई अच्छे डॉक्टर से इलाज कराये।


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