असादुदीन ओवैसी की जीवनी Asaduddin Owaisi Biography in Hindi

Asaduddin Owaisi – असादुदीन ओवैसी भारत के उन नेताओ में एक हैं जो हमेशा चर्चा में रहते हैं। ओवैसी अभी हैदराबाद से सांसद हैं। वे ऑल इंडिय मुस्लिमीन (aimim) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ओवैसी पहली बार 2004 में हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए थे। उसके बाद वे 2009, 2014 और 2019 के आम चुनावों में भी हैदराबाद क्षेत्र से सांसद चुने गए। ओवैसी मुख्य रूप से विवादों और सुर्ख़ियों में तब आए, जब उन्होंने अल्पसंख्यकों पर राजनीति करनी शुरू की। वे हैदराबाद स्थित ओवैसी अस्पताल और रिसर्च सेंटर के अध्यक्ष भी हैं।

अरुण जेटली की जीवनी | Arun Jaitley Biography in Hindi असादुदीन ओवैसी का परिचय – Asaduddin Owaisi Biography in Hindi

पूरा नाम असादुदीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi)
जन्म दिनांक 13 मई 1969
जन्म भूमि हैदराबाद, तेलंगाना
पिता का नाम सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी
माता का नाम  नजमुन्निसा ओवैसी
पत्नी का नाम फरहीन ओवैसी
बच्चे  6 बच्चे
पेशा राजनेता और वकील
शैक्षणिक योग्यता बीए, एलएलबी और बैरिस्टर-एट-लॉ
राष्ट्रीयता भारतीय
धर्म इस्लाम

प्रारंभिक जीवन – Early Life of Asaduddin Owaisi

असदुद्दीन ओवैसी का जन्म 13 मई 1969 को हैदराबाद के सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी और नजमुनेस्सा बेगम को हुआ था। वह एक राजनीतिक परिवार से आते है। ओवैसी के दो भाई हैं (अकबरुद्दीन ओवैसी और बुरहानुद्दीन ओवैसी) जिनमें वो सबसे बड़े हैं। उनके दादा और पिता दोनों राजनितिक से जुड़े थे।

असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद पब्लिक स्कूल से अपनी प्रांरभिक शिक्षा प्राप्त की है। इसे बाद सेंट मैरी जूनियर कॉलेज, हैदराबाद से आगे की पढाई की। ओवैसी के पास बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री है, ये डिग्री उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से प्राप्त की है। इसके अलावा उन्होंने लंदन के लिंकन इन विश्वविद्यालय से अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी की हैं। ओवैसी की शादी फ़रहीन ओवैसी से हुई है। दंपति के छह बच्चे हैं जिनमें एक बेटा, सुल्तान उद्दीन ओवैसी और पांच बेटियां शामिल हैं।

राजनितिक करियर – Asaduddin Owaisi Life History

असदुद्दीन ओवैसी लगभग 80 वर्ष पुराना पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एइएमइएम) के अध्यक्ष हैं। इस पार्टी का इतिहास दो हिस्सों में बंटा हैं। 1928 में नवाब महमूद नवाज़ खान के हाथों स्थापना से लेकर 1948 तक जबकि यह संगठन हैदराबाद को एक अलग मुस्लिम राज्य बनाए रखने की वकालत करता था। उस पर 1948 में हैदराबाद राज्य के भारत में विलय के बाद भारत सरकार ने प्रतिबन्ध लगा दिया था।

और दूसरा भाग जो 1957 में इस पार्टी की बहाली के बाद शुरू हुआ जब उस ने अपने नाम में “ऑल इंडिया” जोड़ा और साथ ही अपने संविधान को बदला। कासिम राजवी ने, जो हैदराबाद राज्य के विरुद्ध भारत सरकार की कारवाई के समय मजलिस के अध्यक्ष थे और गिरफ्तार कर लिए गए थे, पाकिस्तान चले जाने से पहले इस पार्टी की बागडोर उस समय के एक मशहूर वकील अब्दुल वहाद ओवैसी के हवाले कर गए थे।

उसके बाद से यह पार्टी इसी परिवार के हाथ में रही है। अब्दुल वाहेद के बाद सलाहुद्दीन ओवैसी उसके अध्यक्ष बने और अब उनके पुत्र असदुद्दीन ओवैसी उस के अध्यक्ष और सांसद हैं जब उनके छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी विधान सभा में पार्टी के नेता हैं। ओवैसी को उनके समर्थकों ने उन्हें नाकीब-ए-मिलत (समुदाय का नेता) के रूप में स्वागत किया।

ओवैसी ने साल 1994 में राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने आंध्र प्रदेश की चार मीनार विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ा था और इस चुनाव में उनकी जीत हुई थी। वे दो बार 1994 से 2003 के मध्‍य आंध्रप्रदेश की राज्‍यसभा के सदस्‍य रह चुके हैं। 2004 में वे लोकसभा चुनाव में निर्वाचित हुए।

इस कार्यकाल के दौरान वे स्‍थानीय क्षेत्र विकास और सामाजिक न्‍याय और अधिकार तथा रक्षा समितियों के सदस्‍य रहे। 2009 लोकसभा चुनाव में वे दोबारा निर्वाचित हुए और रक्षा समिति एवं आचारनीति समिति के सदस्‍य बनाए गए। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भी वे हैदराबाद निर्वाचित हुवे। उनका राष्ट्रवाद के साथ इस्लामवाद का विचार हैदराबाद के साथ साथ देश के अन्य भागों में भी काफी लोकप्रिय हो रहा है।

ओवैसी सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में पिछड़े मुसलमानों के लिए आरक्षण का समर्थन करते हैं। वह यह भी कहते हैं कि वह हिंदुत्ववादी विचारधारा के खिलाफ हैं लेकिन हिंदुओं के खिलाफ नहीं हैं। 2008 के मुंबई के हमलों के बाद, ओवैसी ने निर्दोष लोगों की हत्या के लिए जकीउर रहमान लखवी और हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की उन्होंने कहा कि देश के दुश्मन मुसलमानों के दुश्मन हैं।

असदुद्दीन ओवैसी से जुड़े विवाद

असदुद्दीन ओवैसी अक्सर अपने भाषणों के चलते विवादों में घिरते चले आएं हैं। कट्टरपंथी हिंदुत्व विचारधारा वाले संगठन अक्सर अपनी आलोचना का शिकार बनाते रहे और उन्हें परेशान करने की कोशिश करते रहे हैं। वर्ष 2009 में, मुगलपुर इलाके की तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के एक मतदान एजेंट सैयद सलीमुद्दीन का पीछा करने और उसे मारने के लिए भारत के निर्वाचन आयोग ने ओवैसी के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज किया। 2016 के एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बयान दिया था कि वो किसी भी सूरत में भारत माता की जय नहीं कहेंगे। इसके बाद उनकी बहुत आलोचना हुई थी।

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