अलका याज्ञनिक की जीवनी | Singer Alka Yagnik Biography In Hindi

Singer Alka Yagnik / अपनी दिलकश आवाज से लोगों के दिलों पर राज करने वाली अलका याज्ञनिक भारत की प्रसिद्ध और अमर गानो के लिए जानी जाती। भारत की ये सुप्रसिद्ध गायिका ने बॉलीवुड मे न केवल अपना पैर जमाया बल्कि 30 सालो तक गायिका क्षेत्र मे लोहा मनवाया। उन्हें भारत की सर्वश्रेष्ठ प्लेबैक सिंगर के तौर पे कई राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला हैं।

Singer Alka Yagnik Biography & Life Story In Hindi,

अलका याज्ञनिक /Alka Yagnik का जन्म 20 मार्च 1966 को कोलकाता के एक मध्यमवर्गीय गुजराती परिवार में हुआ। उनकी मां शुभा याग्निक शास्त्रीय संगीत गायिका थी। अलका ने अपने पढ़ाई  मॉडर्न हाइ स्कूल फॉर गर्ल्स कलकत्ता से की। घर में संगीत का माहौल होने के कारण अलका की रूचि भी संगीत की ओर हो गई। अलका ने अपने करियर की शुरूआत महज छह साल की उम्र में कोलकाता आकाशवाणी से की, जहां वह भजन गाया करती थी। 10 वर्ष की उम्र में अपनी मा के साथ मुंबई आ गयी। मुंबई मे निर्माता निर्देशक राजकपूर से मिली, जिन्होंने उनकी आवाज से प्रभावित होकर उन्हें संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से मिलने की सलाह दी। अलका ने प्लेबैक सिंगर के रूप में अपने करियर की शुरूआत 1979 में प्रदर्शित फिल्म “पायल की झंकार” से की।

बतौर सिंगर अलका याज्ञनिक के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी की जब उन्होने गायन को अपना कॅरियर चुना तो उनके सामने भारत की सुर कोकिला लता मंगेशकर और आशा भोसले थी। लेकिन अलका ने भी इन सबके बीच अपने आप को प्रसिद्ध करने की ठान ली थी।


अलका ने अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म “लावारिस” में “मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है” गाया, जो जबरदस्त हिट हुआ। लगभग आठ वर्ष तक मुंबई में संघर्ष करने के बाद 1988 में फिल्म “तेजाब” में अपने गीत “एक दो तीन” की सफलता के बाद वह पाश्र्वगायिका के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गई। वर्ष 1989 में अलका ने फिल्म “कयामत से कयामत तक” में उदित नारायण के साथ “ऎ मेरे हमसफर”, “अकेले है तो क्या गम है” और “गजब का है दिन सोचो जरा” जैसे सुपरहिट युगल गीत गा ए। इन फिल्मों की सफलता के बाद अलका को कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गए। वर्ष 1994 में फिल्म “हम है राही प्यार के” के सॉन्ग के लिए उन्हें पहली बार सर्वश्रेष्ठ प्लेबैक सिंगर का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

इसके बाद 1999 में प्रदर्शित फिल्म “कुछ कुछ होता है” के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अलका अपने करियर में अब तक सात बार फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित की जा चुकी है। माधुरी दीक्षित, श्रीदेवी, काजोल और जूही चावला जैसी नामचीन अभिनेत्रियों की आवाज कही जाने वाली अलका ने तीन दशक से भी ज्यादा लंबे करियर में हिन्दी के अलावा अवधी, गुजराती, उडिया, राजस्थानी, पंजाबी, मराठी, अंग्रेजी कई फिल्मों के गानों को अपनी आवाज दी। अलका अब तक लगभग 600 फिल्मों के लिए लगभग 20,000 गीत गा चुकी है। वे आज भी फिल्म और संगीत जगत को अपनी दिलकश आवाज के जरिए सुशोभित कर रही है। इन्होंने कुमार सानु व उदित नारायण के साथ ज्यादा गीत गाये हैं। कुमार सानु के साथ गाये गये उनके युगल गीत श्रोताओं द्वारा बहुत पसंद किये गये। अलका 1989 मे नीरज कपूर से शादी की हैं।

भारत की इस प्रसिद्ध गायिका अलका याज्ञनिक ने आजकल गाना कम कर दिया है। इसके पीछे आज के संगीत में बदलाव को मानती है जिसमें मधुरता की जगह फुहड़ता ने ले लिया है। फिल्‍म साजन और धड़कन के सुपरहिट गानों को याद करते हुए अलका बताती है कि वे जब भी किसी स्‍टेज शो में होती है तो उनसे साजन और धड़कन के गानों की फरमाइश जरूर आती है। आजकल के संगीतकार गानों की धुन बनाते हुए केवल फिल्‍म को याद रखते है जिससे गाने की आत्‍मा मर जाती है और वह कुछ समय तक लोगों को याद रहते है। वही जब पहले गाने बनते थे तो वो अमर हो जाते थे।


उनका कहना है कि वे अच्‍छे गाने गाना चाहती है न कि फुहड़ गाने, जिसे गाकर उनकी आत्‍मा धिक्‍कारे। वही रियलिटी शो के बारे में उनका कहना है कि इनसे छुपी हुई प्रतिभाओं को मौका मिलता है लेकिन जब संदेशो के आधार पर जब किसी गायक को बाहर निकाल दिया जाता है तो बहुत खराब लगता है क्‍योंकि कला किसी के वोट की मोहताज नही होनी चाहिए।


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