टेलीविजन अविष्कारक जॉन लॉगी बेयर्ड | John Logie Baird Biography In Hindi

John Logie Baird / जॉन लॉगी बेयर्ड (J.L Baird) एक स्कॉटिश वैज्ञानिक, इंजीनियर और इन्नोवेटर थे। जिन्होंने टेलीविजन आविष्कार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने 1928 में रंगीन टेलीविजन का भी प्रदर्शन किया।

टेलीविजन अविष्कारक जॉन लॉगी बेयर्ड | John Logie Baird Biography In Hindiजॉन लॉगी बेयर्ड की जीवनी – John Logie Baird Biography in Hindi

जॉन लॉगी बेयर्ड का जन्म 14 अगस्त, 1888 को ग्लैसगो स्कॉटलैंड के निकट हैलन्सबर्ग में हुआ था। इनके पिता एक पादरी थे फिर भी अर्थाभाव से घिरे रहे। वे शैशवावस्था से ही निर्बल थे। वे चार भाई बहन थे। उनका बचपन एक माली के लड़के के साथ बीता। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा भी स्थानीय विद्यालय में हुई। उनकी सदैव अध्ययन की ओर रुचि रही। उन दिनों उनके विद्यालय में फोटोग्राफी पर विशेष बल दिया जाता था। इसमें उनहोने इतनी रुचि दर्शायी कि विद्यालय में फोटोग्राफी के अध्यक्ष बन गए। उन्होने बारह वर्ष की अल्पावस्था में अपने साथियों की सहायता से एक दूरदर्शन लाइन का निर्माण किया और अपने ऊपर वाले कक्ष को चार साथियों के घर से जोड़ दिया।

अपनी प्राथमिक स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, बेयर्ड ने ग्लासगो में रॉयल टेक्निकल कॉलेज में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का अध्ययन किया। हालांकि, प्रथम विश्व युद्ध के प्रकोप के साथ उनकी पढ़ाई बाधित हुई थी, और साथ में स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्हें सेवा के लिए भी खारिज कर दिया गया था।

वे कुछ समय के लिए कार्य करने इंग्लैंड भी गए थे। 1920 में यूनाइटेड किंगडम लौटने पर, बेयर्ड ने यह पता लगाना शुरू किया कि आवाज़ के साथ चलती छवियों को कैसे प्रेषित किया जाए। हालांकि, कॉर्पोरेट प्रायोजकों की कमी थी, इसलिए उन्होंने जो भी सामग्री तैयार की, वह स्क्रॉउज करने में सक्षम था।

इन्होने अविष्कार के समय कार्डबोर्ड, साइकिल लैंप, गोंद, स्ट्रिंग और मोम “टेलीविजन” का हिस्सा थे। 1924 में परिक्षण किया, बेयर्ड ने कुछ फीट दूर एक झटकेदार छवि को प्रेषित किया। इसके बाद इन्होने इसमें और कार्य किया।

सन् 1925 ई. की 2 अक्टूबर को, उन्होंने अपने उपकरण में प्रकाश को विद्युत किरणों में परिवर्तित करने के लिए एक नई चीज लगायी। स्वीच दबाने पर वे स्वयं ही आश्चर्य चकित रह गए। उनके उपकरण में दृश्य का पूरा चेहरा अभर आया था। उसे देखकर वे कुर्सी से उछल पड़े।

उन्होंने मानवाकृति के प्रसारण में सफलता प्राप्त की। सन् 1926 ई, में उन्होंने रॉयल इंस्टीट्यूट लंदन में, चलते-फिरते दूरदर्शन चित्रों के प्रेषण का प्रदर्शन किया। सन् 1926 ई में जर्मन पोस्ट कार्यालय में दूरदर्शन सेवा विकसित करने के लिए उन्हें सुविधाएं दीं। सन् 1928 ई. में ही उन्होंने रंगीन दूरदर्शन के प्रेषण पर भी कार्य करना शुरू कर दिया था। 1929 में जर्मन पोस्ट ऑफिस में टीवी सेवा के लिए अपनी सेवाएं प्रदान की। सन् 1936 ई. में बी. बी. सी. ने दूरदर्शन सेवा उनके द्वारा विकसित उपरकण से शुरु कर दी। तब तक मारकोनी की विधि भी विकसित हो गई थी।

1931 में, 43 वर्षीय बेयर्ड ने मार्गरेट अल्बु से शादी की। इनके बेटी, डायना और एक बेटा मैल्कम था।

बेयर्ड अर्थाभाव और स्वास्थ्य के खराब होने पर भी जीवन के अंतिम वर्षों में सन् 1945 ई. तक रंगीन दूरदर्शन के क्षेत्र में कार्यरत रहे। ठंड लग जाने से 14 जून सन् 1946 ई. को बेक्सहील न-सी, ससैक्स में बेयर्ड का निधन हो गया। मरणोपरान्त उनकी स्मृति में अनेक स्तम्भ बनाए गए।

बेयर्ड ने कलर टेलीविजन का आविष्कार 1928 में किया था। शुरुआती दौर में टेलीविजन के आविष्कार में अग्रणी थे पोल निप्कोओ, बोरिस रोसिंग, व्लादिमीर ज्वोर्किन, जॉन लोगी बेयर्ड, फिलो फर्नसवॉर्थ, चा‌र्ल्स फ्रांसिस जेनकिंस और विलियम बेल। 1924-26 में स्कॉटलैंड के इंजीनियर चा‌र्ल्स जेनकिंस और जॉन लोगी बेयर्ड इमेज ट्रांसमिटेड मैथड को मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल दोनों फॉर्म में प्रदर्शित करने में सफल रहे थे।


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