जल मंदिर पावापुरी का इतिहास, जानकारी | Jal Mandir Pawapuri

Jal Mandir / जल मंदिर बिहार के पावापुरी शहर में स्थित है। जल मंदिर में मुख्‍य पूज्‍यनीय वस्‍तु भगवान महावीर की चरण पादुका है। यह मंदिर एक तालाब के बीचों-बीच बना हुआ है। कहा जाता है कि यहीं पर भगवान महावीर का अंतिम संस्‍कार किया गया था। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण महावीर के बड़े भाई राजा नंदीवर्द्धन ने करवाया था। जल मंदिर विमान आकार में बना हुआ है।

जल मंदिर पावापुरी का इतिहास, जानकारी | Jal Mandir Pawapuri History in Hindi

जल मंदिर की जानकारी – Jal Mandir, Pawapuri Bihar in Hindi

जल मंदिर बिहार के नालंदा जिले के पावापुरी में स्थित भगवान महावीर स्वामी को समर्पित मंदिर हैं। जैन धर्म के मतावलंबियो के लिये एक पावापुरी अत्यंत पवित्र शहर है। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने निर्वाण यहीं प्राप्त की थी। पावापुरी के पांच मुख्य मंदिरों में से एक जल मंदिर है। यहां भगवान महावीर के पार्थिव अवशेष हैं। यह नालंदा जिला मुख्यालय से करीब 11 किमी दूर है।

इस मंदिर में सालों भर देश-विदेश के श्रद्धालु आते रहते हैं। हर साल दीपावली के मौके पर भगवान महावीर की विशेष पूजा की जाती है। इसमें भाग लेने के लिए कई देशों के श्वेताम्बर व दिगंबर जैन श्रद्धालु आते हैं।

कार्तिक अमावस्या की मध्य रात्रि में भगवान महावीर का निर्वाण हुआ था। इसी उपलक्ष्य में हर साल दीपोत्सव पर यहां जैन श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है। खास यह कि जलमंदिर (अग्नि संस्कार भूमि) में लड्डू चढ़ाने के लिए श्वेताम्बर व दिगंबर श्रद्धालुओं के बीच अलग-अलग बोली लगती है। दोनों संप्रदायों में अलग-अलग जो ज्यादा बोली लगाते हैं उन्हें सबसे पहले निर्वाण लड्डू चढ़ाने का मौका मिलता है।

कहा जाता है कि जल मंदिर में प्रवेश करते ही मनुष्य सारे बाह्य वातावरण को भूल कर प्रभु भक्ति में अपने आप को खो जाता है। ऐसा शुद्ध व पवित्र वातावरण है यहां का। भगवान महावीर की निर्वाण भूमि का प्रत्येक कण पूजनीय है। प्रभु महावीर की अन्तिम दर्शन इस पावन भूमि में हुई थी अत: यहां का शुद्ध वातावरण आत्मा को परम शांति प्रदान करता है।

जल मंदिर का इतिहास – Jal Mandir History in Hindi

माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान महावीर के बड़े भाई राजा नंदिवधन के द्वारा करवाया गया था। लगभग 2600 वर्ष पूर्व प्राचीन काल मे पावापुरी मगध साम्राज्य का हिस्सा था। जिसे मध्यम वापा या अपापपुरी कहा जाता था। जिनप्रभा सूरी ने अपने ग्रंथ विविध तीर्थ कल्प रूप में इसका प्राचीन नाम अपापा बताया है। मगध शासक बिम्बिसार का पुत्र आजातशत्रु जैन धर्म के अनुयायी थे और भगवान महावीर का समकालीन था। आजातशत्रु के शासनकाल में राजकिय औषधालया पावापुरी में निर्माण कराया गया था। जब भगवान महावीर पावापुरी आए थे।

माना जाता है कि भगवान महावीर को यहीं मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। जल मंदिर के नाम से ही पता चलता है कि मंदिर खिले कमलों में भरे जलाशयों के बीच में स्थित होगा। यह मंदिर जैन धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल है। इस खूबसूरत मंदिर का मुख्य पूजा स्थल भगवान महावीर की एक प्राचीन चरण पादुका है। यह उस स्थान को इंगित करता है जहां भगवान महावीर के पार्थीव अवशेषों को दफ़नाया गया था।

मंदिर का निर्माण विमान के आकार में किया गया है और जलाशय के किनारों से मंदिर तक लगभग 600 फूट लम्बा पत्थर का पुल बनाया गया है। अनुश्रुतियों के अनुसार भगवान महावीर के अंतिम संस्कार मे भाग लेनेवाले लोगों के द्वारा बड़ी गढ़ा बन गया जो वर्तमान जलशय में तब्दील हो गया।

मंदिर की बनावट – Jal Mandir Information

जलमंदिर भगवान महावीर की निर्वाण स्थली है। 84 बीघे के तालाब के बीच सफेद संगमरमर का मंदिर ताजमहल की तरह दिखाई देता है। यह सफेद संगमरमर से निर्मित एक गोलाकार मंदिर है जिसमें मधुमक्खी के छ्त्ते के आकार का पवित्र स्थल है जिसके भिर्श पर भगवान महावीर के चरणचिन्ह खुदे हैं। यह वही स्थान है जहां भगवान महावीर ने अपने धर्म का अंतिम उपदेश दिया था। यह भी मान्यता है की इंद्रभूति गौतम का भगवान महावीर से यहीं मिलाप हुआ था जिस से प्रभावित होकर महावीर के पास दीक्षा ली और प्रथम गणधर बने।

महोत्स्व – Jal Temple Festival

कार्तिक अमावस्या की मध्य रात्रि में भगवान महावीर का निर्वाण हुआ था। इसी उपलक्ष्य में हर साल दीपोत्सव पर यहां जैन श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है। दिवाली की रात में हिलता है महावीर की चरण पादुका का छत्र : निर्वाण भूमि में जैन श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ यहां एक विशेष मान्यता के कारण जुटती है।

मान्यता है कि भगवान महावीर की अंतिम संस्कार भूमि जलमंदिर, जहां पर अभी भगवान की चरण पादुका उनके दो शिष्यों गौतम स्वामी और सुधर्मा स्वामी के साथ अवस्थित है वहां भगवान महावीर की चरण पादुका का छत्र दिवाली की मध्य रात्रि को हिलता-डुलता है और इस दृश्य को जो भी जैन श्रद्धालु देखते हैं उनका जीवन धन्य हो जाता है। इस दृश्य को ही देखने के लिए हजारों श्रद्धालु यहां रात भर टकटकी लगाये रहते हैं।


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1 thought on “जल मंदिर पावापुरी का इतिहास, जानकारी | Jal Mandir Pawapuri”

  1. सर, जलमन्दिर पावापुरी के बारे में आपने बहुत ही अच्छा वर्णन किया है , क्योकि ये हर व्यक्ति के लिये एक धार्मिक स्थान है , जहाँ हर किसी को मानसिक व आत्मिक शांति मिलती है ,

    भगवान महावीर की चरण पादुका के दर्शनों की अभिलाषा हर भक्त को हे ।
    Good

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