इंडिया गेट का इतिहास, कुछ मजेदार बातें | India Gate History In Hindi

India Gate / इंडिया गेट दिल्ली का ही नहीं अपितु भारत का महत्‍वपूर्ण स्‍मारक है। इंडिया गेट को 82,000 से अधिक ब्रिटिश भारतीय सैनिकों की याद में निर्मित किया गया था जिन्‍होंने प्रथम विश्‍वयुद्ध और अफ़ग़ान युद्ध में वीरगति पाई थी। यह स्‍मारक 42 मीटर ऊंची आर्च से सज्जित है और इसे प्रसिद्ध वास्‍तुकार एडविन ल्‍यूटियन्‍स ने डिज़ाइन किया था। यह ऐसी प्रसिद्द स्मारक हैं की दिल्ली आने वाले पर्यटक यहाँ अवश्य आते हैं।

इंडिया गेट का इतिहास, कुछ मजेदार बातें | India Gate History In Hindiइंडिया गेट को पहले अखिल भारतीय युद्ध स्‍मृति के नाम से जाना जाता था। इंडिया गेट की डिज़ाइन इसके फ्रांसीसी प्रतिरूप स्‍मारक आर्क- डी-ट्रायोम्‍फ के समान है।

इंडिया गेट का इतिहास –  India Gate History In Hindi 

यह इमारत लाल पत्‍थर से बनी है जो एक विशाल ढांचे के मंच पर खड़ी है। इसके आर्च के ऊपर दोनों ओर ‘इंडिया’ लिखा है। इसकी दीवारों पर 70,000 से अधिक भारतीय सैनिकों और 13,300 ब्रिटिश सैनिको के नाम शिल्पित किए गए हैं, जिनकी याद में इसे बनाया गया है। इसके शीर्ष पर उथला गोलाकार बाउलनुमा आकार है जिसे विशेष अवसरों पर जलते हुए तेल से भरने के लिए बनाया गया था।

भारतीय सेनाओं के शहीदों के लिए, जो फ्रांस और फ्लैंडर्स मेसोपोटामिया, फारस, पूर्वी अफ्रीका गैलीपोली और निकटपूर्व एवं सुदूरपूर्व की अन्य जगहों पर शहीद हुए, और उनकी पवित्र स्मृति में भी जिनके नाम दर्ज हैं और जो तीसरे अफ़ग़ान युद्ध में भारत में या उत्तर-पश्चिमी सीमा पर मृतक हुए।

शहीद सैनिकों की स्मृति में यहाँ एक राइफ़ल के ऊपर सैनिक की टोपी रखी गयी है जिसके चार कोनों पर सदैव ‘अमर जवान ज्योति’ जलती रहती है। इसकी दीवारों पर उन हज़ारों शहीद सैनिकों के नाम हैं। सबसे ऊपर अंग्रेज़ी में लिखा है-

To the dead of the Indian armies who fell honoured in France and Flanders Mesopotamia and Persia East Africa Gallipoli and elsewhere in the near and the far-east and in sacred memory also of those whose names are recorded and who fell in India or the north-west frontier and during the Third Afgan War.

निर्माण-स्थल का इतिहास –

1920 के दशक तक,पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पूरे शहर का एकमात्र रेलवे स्टेशन हुआ करता था। आगरा-दिल्ली रेलवे लाइन उस समय लुटियन की दिल्ली और किंग्सवे यानी राजाओं के गुजरने का रास्ता, जिसे अब हिन्दी में राजपथ नाम दे दिया गया है, पर स्थित वर्तमान इण्डिया गेट के निर्माण-स्थल से होकर गुजरती थी। आखिरकार इस रेलवे लाइन को यमुना नदी के पास स्थानान्तरित कर दिया गया। इसके बाद सन् 1924 में जब यह मार्ग प्रारम्भ हुआ तब कहीं जाकर स्मारक स्थल का निर्माण शुरू हो सका। 42 मीटर ऊँचे इण्डिया गेट से होकर कई महत्वपूर्ण मार्ग निकलते हैं. पहले इण्डिया गेट के आसपास होकर काफी यातायात गुजरता था। परन्तु अब इसे भारी वाहनों के लिये बन्द कर दिया गया है। शाम के समय जब स्मारक को प्रकाशित किया जाता है तब इण्डिया गेट के चारो ओर एवं राजपथ के दोनों ओर घास के मैदानों में लोगों की भारी भीड़ एकत्र हो जाती है। 625 मीटर के व्यास में स्थित इण्डिया गेट का षट्भुजीय क्षेत्र 306,000 वर्ग मीटर के क्षेत्रफल में फैला है।

जब इण्डिया गेट बनकर तैयार हुआ था तब इसके सामने जार्ज पंचम की एक मूर्ति लगी हुई थी। जिसे बाद में ब्रिटिश राज के समय की अन्य मूर्तियों के साथ कोरोनेशन पार्क में स्थापित कर दिया गया। अब जार्ज पंचम की मूर्ति की जगह प्रतीक के रूप में केवल एक छतरी भर रह गयी है।

इंडिया गेट के तल पर एक अन्‍य स्‍मारक, अमर जवान ज्‍योति है, जिसे स्‍वतंत्रता के बाद जोड़ा गया था। यहाँ निरंतर एक ज्‍वाला जलती है जो उन अंजान सैनिकों की याद में है जिन्‍होंने इस राष्‍ट्र की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। अमर जवान ज्‍योति, इंडिया गेट, दिल्ली अमर जवान ज्योति की स्थापना 1971 के भारत-पाक युद्ध में भाग लेने वाले सैनिकों की याद में की गई थी।

इसके आस पास हरे भरे मैदान, बच्‍चों का उद्यान और प्रसिद्ध बोट क्‍लब इसे एक उपयुक्‍त पिकनिक स्‍थल बनाते हैं। इंडिया गेट के फव्‍वारे के पास बहती शाम की ठण्डी हवा ढेर सारे दर्शकों को यहाँ आकर्षित करती है। शाम के समय इंडिया गेट के चारों ओर लगी रोशनियों से इसे प्रकाशमान किया जाता है जिससे एक भव्‍य दृश्‍य बनता है। स्‍मारक के पास खड़े होकर राष्‍ट्रपति भवन का नज़ारा लिया जा सकता है। सुंदरतापूर्वक रोशनी से भरे हुए इस स्‍मारक के पीछे काला होता आकाश इसे एक यादगार पृष्‍ठभूमि प्रदान करता है। दिन के प्रकाश में भी इंडिया गेट और राष्‍ट्रपति भवन के बीच एक मनोहारी दृश्‍य दिखाई देता है।

हर वर्ष 26 जनवरी को इंडिया गेट गणतंत्र दिवस की परेड का गवाह बनता है। जहाँ आधुनिकतम रक्षा प्रौद्योगिकी के उन्‍नयन का प्रदर्शन किया जाता है। यहाँ आयोजित की जाने वाली परेड भारत देश की रंगीन और विविध सांस्‍कृतिक विरासत की झलक भी दिखाती है, जिसमें देश भर से आए हुए कलाकार इस अवसर पर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।

इंडिया गेट की रोचक तथ्य – India Gate Interesting Facts In Hindi

1). दिल्ली भारत के दिल का एक प्रतीक है जो देश के शहीदों द्वारा इंडिया गेट के रूप में देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने के लिए समर्पित है। इस स्मारक को भारत की विरासत के रूप में माना जाता है और ये नई दिल्ली में राजपथ पर स्थित है।

2). इंडिया गेट सर एडविन लुटियन द्वारा डिजाइन किया गया था और 1931 में बनाया गया था और शुरू में इसे ‘अखिल भारतीय युद्ध स्मारक’ के रूप में नामित किया गया था। पेरिस में अर्क डे ट्रिओम्फेसे प्रेरित होकर इसका निर्माण हुआ।

3). इसे लाल बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट से बनाया गया है। इंडिया गेट 42 मीटर लंबा खड़ा है। गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) को भारत के राष्ट्रपति और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ-साथ अन्य सभी शीर्ष राजनीतिक नेता हर साल इंडिया गेट पर अपनी श्रद्धा के साथ श्रद्धांजलि अर्पित करते है।

4). प्रथम विश्व युद्ध और तीसरे एंग्लो -अफगान युद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना के 82,000 सैनिकों ने शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य की श्रेष्ठता की रक्षा करते हुए अपनी जान गवाँ दी। इंडिया गेट इन सैनिकों का सम्मान करने के लिए बनाया गया था। इन सभी सैनिकों का इंडिया गेट की दीवारों पर नाम खुदा है।

5). 1947 में जब भारत आज़ाद हुआ था तब ब्रिटिश आर्मी के भारतीय सैनिको के बलिदानो के लिये इंडिया गेट का निर्माण किया गया था।

6). इंडिया गेट में प्रसिद्ध अमर जवान ज्योति भी है, जो 24×7 जलती रहती है. इस अमर जवान ज्योति को 1971 के इंडो पाक युद्ध में शहीद हुए सैनिको के लिए बनायी गयी थी। 1972 में गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसे जलाया था।

7). इंडिया गेट को विश्व को सबसे बड़ी वैश्विक युद्ध धरोहर माना जाता है, जिसे रोज़ लाखो भारतीय देखने आते है। भारत के राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री इंडिया गेट को देश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलो में से एक मानते है। भारत में सभी लोग इंडिया गेट के महत्त्व को जानते है।

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