वैज्ञानिक हंफ्री डेवी की जीवनी | Humphry Davy Biography In Hindi

Humphry Davy / हंफ्री डेवी एक ब्रिटिश रासायनज्ञ वैज्ञानिक थे। इन्होंने कोयला की खानों में जलाने के सुरक्षा दीप का आविष्कार किया। इसके अलावा इन्होंने इलेक्ट्रोलिसिस, सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, बेरियम, बोरोन, नाइट्रस ऑक्साइड के भी खोजें कीं। साथ ही सिद्ध किया कि हीरा वास्तव में शुद्ध कार्बन है।

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सर हंफ्री डेवी का जन्म 17 दिसम्बर, 1778 को पेन्ज़ान्स, कॉर्नवॉल, इंग्लैंड एक गरीब नक्काश के घर में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा पेंजांस एवं टूरो स्कूल में हुई। बाद में वे एक पंसारी के यहां एप्रेंटिस करने गए, जो दवाएं बनाता था और जिसके पुस्तरालय में ढेरों किताबें थीं। वहीं इन्होंने निकलसन और लेवॉयजिए की खोजो के बारे में पड़ी।

अविष्कार और खोज –

कोयला आज भी उर्जा का एक प्रमुख स्रोत है। परंतु जब तक पेट्रोल जैसे पदार्थों का अविष्कार नहीं हुआ था कोयला ऊर्जा का एकमात्र मुख्य स्रोत्र था। 19वी सदी के आरंभ तक कोयला खदाने मजदूरों के लिए किसी भयानक कब्र से कम नहीं थी। आए दिन खदानों में दुर्घटनाएं होती रहती थी और मजदूर मरते रहते थे। इन दुर्घटनाओं में अधिकांश दुर्घटनाएं आग लगने से होती थी। वस्तुत: धरती के गर्भ में जिन लैम्पो की सहायता से काम करते थे वे लैंप अपनी लौ से ताप उत्पन्न करते थे। उन लैंपों में अक्सर खदानों में फैली मिथेन गैस आग पकड़ लेती थी और दुर्घटना घट जाती थी। इन दुर्घटनाओं से मुक्ति दिलाने का श्रेय डेवी को ही जाता हैं। अभयदिप का आविष्कार सर हम्फ्री डेवी ने 1815 में किया था। आजकल इन लैम्पो का प्रयोग मुख्य रूप से खतरनाक गैसों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए किया जाता है। क्योंकि इन लैम्पो की लौ पर ज्वलनशील गैसों का प्रभाव पड़ता है।

सर हम्फ्री डेवी का आविष्कार केवल अभयदीप तक ही सीमित नहीं थे उन्होंने अपना वैज्ञानिक जीवन सन 1797 से आरंभ किया। उन्होंने अपने को जोखिम में डालकर रोगियों को बेहोश करने के लिए काम में आने वाले पदार्थ नाइट्रस ऑक्साइड यानी लाफिंग गैस पर बहुत से अनुसंधान किए। उस समय वे 21 वर्ष के थे। उन्होंने गैस की कुछ मात्रा तैयार किया और उसे एक रेशमी थैली में बंद कर नाक को बिना बंद किए उसमें आधे मिनट तक सांस ली। पहले उन्हें चक्कर आने लगा और बाद में अचेत हो गए। गैस में कुछ और अधिक देर तक सांस लेने के बाद उन्हें ऐसा लगा कि जैसे वे हंस रहे हो। उन्हें यह अवस्था ही आनंददायक लगी। शीघ्र ही वह बेहोश हो गए और उन्हें लगा जैसे एक नई दुनिया में पहुंच गए। इसे लेने के बाद शरीर पीड़ा का एहसास नहीं होता हैं, इस तरह इन्होंने लॉफिंग गैस का अविष्कार किए। इस गैस का आविष्कार के साथ डेवी का यश लंदन तक फैल गया। इस आधार पर सन 1800 में उन्हें रॉयल सोसाइटी इंस्टिट्यूट में प्रध्यापक नियुक्ति किया गया।

गैस का असर कि कोई दर्द तकलीफ नहीं बस हंसी और मस्ती ही मस्ती। 1809 में उन्होंने आर्कलाइट का अविष्कार कर उसका सफल प्रदर्शन किया। डेवी ने विघुत-रयासन विधि से सोडियम हाइड्रॉक्साइड यानि कास्टित सोडे से सोडियम को पृथक किया। 1812 में उन्होंने 21 साल फैराडे की प्रतिभा को चीन्ह कर उसे सहायक बना लिया और एक संपन्न विधवा से विवाह कर दोनों के साथ यूरोप यात्रा पर निकल गए। इटली में जेनेवा में उन्होंने टारपीडो मछली से उत्पन्न बिजली का परीक्षण किया और फ्लोरेंस में आर्कलाइट से हीरा जलाकर उन्होंने कार्बन सिद्ध कर दिखाया। उनकी मान्यता सही निकली कि क्लोरीन यौगिक नहीं, तत्व है। इस महान वैज्ञानिक की 29 मई, 1829 जेनेवा, स्विट्ज़रलैंड में मृत्यु हो गई।


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