दुर्गा पूजा की कहानी – Durga Puja ki Katha

Durga Puja ki Kahaani – दुर्गा पूजा भारत में बहुत धूम धाम से मनाया जाता है। इसमें 9 दिनों तक देवी के 9 रूपों की आराधना की जाती है। और दशमी को विजय दशमी के तौर पर मनाया जाता है। तो चलिए जानते है इसके पीछे की कहानी (Durga Puja Kyun Manaya Jata Hain) :-

इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। दुर्गा पूजा का त्योहार देवी दुर्गा और राक्षस महिषासुर के बीच हुए युद्ध के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है।

Durga Puja ki Katha

1). पहली कथा – Durga Puja Story in Hindi

ऐसा कहा जाता है कि महिषासुर नाम का एक राक्षस था। जिसने कई सालों तक तपस्या की और ब्रम्हा जी को खुश किया। और भगवान ब्रह्मा से अमर होने का वरदान मांगा। महिषासुर की भक्ति से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे कई वरदान दिए और अमरत्व की जगह उन्हें यह वरदान दिया कि उसकी मृत्यु स्त्री के हाथों होगी। ब्रह्मा जी से यह वरदान पाकर महिषासुर काफी प्रसन्न हो गया और सोचने लगा की किसी भी स्त्री में इतनी ताकत नहीं है, जो उसके प्राण ले सकें।

इसी विश्वास के साथ महिषासुर ने अपनी असुर सेना के साथ देवों के विरूद्ध युद्ध छेड़ दिया, जिसमें देवों की हार हो गई और सभी देवगण मदद के लिए त्रिदेव यानी भगवान शिव, ब्रह्मा और विष्णु के पास पहुंचें।तीनों देवताओं ने अपनी शक्ति से देवी दुर्गा को जन्म दिया जिसके बाद दुर्गा ने राक्षस महिषासुर से युद्ध कर उसका वध किया, और इस तरह से महिषासुर एक स्त्री के हाथों मारा गया।

2). दूसरी प्राचीन कथा – Durgotsava Story in Hindi

दूसरी प्राचीन कथा के मुताबिक त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण करने से पहले और रावण के साथ हुए युद्ध में जीत के लिए शक्ति की देवी मां भगवती की आराधना की थीं। रामेश्वरम में प्रभु श्रीराम ने नौ दिनों तक देवी की पूजा की। श्रीराम की भक्ति से प्रसन्न होकर मां ने श्रीराम को लंका में विजय प्राप्ति करने का आशीर्वाद दिया। दसवें दिन भगवान राम ने लंकापति रावण को युद्ध में हराकर उसका वध कर लंका पर विजय प्राप्त की। इस दिन को विजयदशमी यानी दशमी के रूप में जाना जाता है।

इस तरह बुराई पर अच्छाई की जीत हुई। इसके अलावा इस त्योहार को फसल से जोड़कर भी देखा जाता है।

दुर्गा पूजा को दुर्गोत्सव या शरदोत्सव भी कहा जाता है। यह एक हिन्दू पर्व है, जिसमें हिन्दू देवी दुर्गा की पूजा करते है. इसमें 6 दिनों को महालय, षष्ठी, महा सप्तमी, महा अष्टमी, महा नवमी और विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है।

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