मुगल सम्राट औरंगजेब की कहानी | About Aurangzeb History In Hindi

About Mughal Emperor Aurangzeb History In Hindi,

औरंगजेब का इतिहास / Aurangzeb History In Hindi :-


पूरा नाम   –  अबुल मुजफ्फर मुहीउद्दीन औरंगजेब आलमगीर.
जन्मस्थान  –  दाहोद (गुजरात)
जन्म         –  4 नवम्बर, 1618 ई
पिता       –  शाहजहां
माता      –   मूमताज महल
विवाह    –   बेगम नवाब बाई, औरंगाबादी महल, उदयपुरी महल, झैनाबदी महल
बेटे       –   बहादुर शाह, आज़म शाह, मोहम्मद काम बख्स, मोहम्मद सुल्तान, सुल्तान मोहम्मद अकबर,

शुरुआती जीवन  :- 

मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगज़ेब मुगल साम्राज्य का 6वाँ बादशाह था। औरंगजेब का जन्म 4 नवम्बर, 1618 ई को  गुजरात के दाहोद गाव में शाह जहाँ और मूमताज महल के तीसरे बेटे के रूप मे हुआ। औरंगज़ेब के बचपन का अधिकांश समय नूरजहाँ के पास बीता था। हालाँकि उनका शुरुवाती जीवन बहुत ही गंभीर रहा। वह बहुत दिन तक मुस्लिम कट्टरपंथियों से जुड़ा रहा और मुग़ल साम्राज्य के शाहिपने, मादकता और वासना से दूर रहा। 26 फ़रवरी 1628 में जब शाहजहा ने लिखित तौर पर ऐलान किया की उनके तख़्त के काबिल औरंगजेब है। इसके बाद औरंगजेब को बाहर युद्ध कला सिखने भेजा गया, और युद्ध कला में निपुण होने के बाद वे फिर से अपने परिवार के साथ रहने लगे।

बादशाहत का सफ़र :-

1643 ई. में औरंगज़ेब को 10,000 जात एवं 4000 सवार का मनसब प्राप्त हुआ। ‘ओरछा’ के जूझर सिंह के विरुद्ध औरंगज़ेब को प्रथम युद्ध का अनुभव प्राप्त हुआ था। 18 मई, 1637 ई. को फ़ारस के राजघराने की ‘दिलरास बानो बेगम’ के साथ औरंगज़ेब का निकाह हुआ। 1636 ई. से 1644 ई. एवं 1652 ई. से 1657 ई. तक औरंगज़ेब गुजरात (1645 ई.), मुल्तान (1640 ई.) एवं सिंध का भी गर्वनर रहा।

जब शाहजहाँ 1657 में बहुत बीमार पड़े तो औरंगजेब और उसके बड़े भाई के बिच तनाव और भी बढ़ गया और युद्ध छिड गया। कुछ समय बाद औरंगजेब ने अपने पिता शाह जहाँ को कैद में डाल दिया। हालाँकि कुछ इतिहासकरों का ऐसा मानना है की, शाह जहाँ ताजमहल पर पूरा मुग़ल ख़जाना खर्च कर रहें थे इसीलिए उन्हें कैद में डाला गया। शाहजहां की मौत वही कैदखाने में हुई।

आगरा पर क़ब्ज़ा कर जल्दबाज़ी में औरंगज़ेब ने अपना राज्याभिषक “अबुल मुजफ्फर मुहीउद्दीन मुजफ्फर औरंगज़ेब बहादुर आलमगीर” की उपाधि से 31 जुलाई, 1658 ई. को दिल्ली में करवाया। और इस तरह वे हिन्दुस्तान के एकछत्र सम्राट बन गये।

‘खजुवा’ एवं ‘देवराई’ के युद्ध में सफल होने के बाद 15 मई, 1659 ई. को औरंगज़ेब ने दिल्ली में प्रवेश किया, जहाँ शाहजहाँ के शानदार महल में जून, 1659 ई. को औरंगज़ेब का दूसरी बार राज्याभिषेक हुआ।

औरंगजेब के पूर्वज अकबर, बाबर आदी शासकों ने भारत को जो समृध्दि प्रदान की थी, औरंगजेब ने उसे बखूबी बढ़ाया। परन्तु अपने कट्टरपन तथा अपने पिता और भाइयों के प्रति दुर्व्यवहार के कारण उन्हें देश की जनता पसंद नहीं करते थे। हालाँक उसकी ताकत और कौशल के लिए उसे सम्मानित भी किया जा चूका था।


इस अवधि के दौरान उसने दो बार 1664 और 1670 में महँ बंदरगाह लूटा। फारसियों कि जगह, मध्य एशिया, तुर्क पर भी कब्ज़ा कर लिया था। औरंगजेब नें अपने परदादा अकबर के तरीक़ो को अपनाया, हर किसी कि दुश्मन है, उन्हें सामजस्य में रखो और उन्हें शाही सेवा में रखो। इस प्रकार शिवाजी को हराया गया और सुलह के लिए 1666, आगरा में, सेना में एक स्थान दिया गया। औरंगज़ेब की सैन्य प्रबन्ध में 60,000 घोड़े, 1,00000 पैदल सैनिक, 50,000 ऊँट, 3,000 हाथी थे।

औरंगजेब पवित्र जीवन व्यतीत करता था। अपने व्यक्तिगत जीवन में वह एक आदर्श व्यक्ति था। वह उन सब दुर्गुणों से सर्वत्र मुक्त था, जो एशिया के राजाओं में सामान्यतः थे। वह यति के जैसा जीवन जीता था। खाने-पीने, वेश-भूषा और जीवन की अन्य सभी-सुविधाओं में वह बेहद संयम बरतता था। प्रशासन के कार्यों में व्यस्त रहते हुए भी वह अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए धार्मिक पुस्तक क़ुरान की नकल करके और टोपियाँ सीकर कुछ पैसा कमाने का समय निकाल लेता था।


औरंगजेब का राज्य बहुत ही विस्तृत था इस वजह से उस समय मुगल साम्राज्य सबसे विशाल और शक्तिशाली साम्राज्य माना जाता था। उसके 50 वर्ष के शासन काल को दो भागों में देखा जा सकता है। उसने अपने शासन काल के पहले भाग में अपनी राजधानी में (1658-1682) शासन किया और दुसरे भाग में डेक्कन में (1682-1707)। पहले पलामू झारखंड में औरंगजेब ने शासन किया साथ ही, बंगाल और असम में भी अहोम राजा जयद्ध्राजा को हरा कर। और राजा अरकान, मीर जुमला और शाइस्ता खान को हरा कर चिट्टागोंग और संद्विप पर भी कब्ज़ा किया। उन्होंने 48 साल तक अपना शासन स्थापीत रखा।

औरंगज़ेब की मृत्यु :-

औरंगज़ेब के अन्तिम समय में दक्षिण में मराठों का ज़ोर बहुत बढ़ गया था। उन्हें दबाने में शाही सेना को सफलता नहीं मिल रही थी। इसलिए सन् 1683 में औरंगज़ेब स्वयं सेना लेकर दक्षिण गये। वह राजधानी से दूर रहते हुए, अपने शासन−काल के लगभग अंतिम 25 वर्ष तक उसी अभियान में रहे। वही युद्ध के दौरान एक हाथी के प्रहार से चोटिल हो गये। जिससे उन्हें कई दिनों तक चोटिल रहने के बाद भी वे युद्ध में लड़ते रहे, युद्ध का लगभग पूरा क्षेत्र हथियो से भरा पड़ा था और लड़ते-लड़ते ही अंत में 3 मार्च सन् 1707 ई. को मृत्यु हो गई। और उनकी इसी बहादुरी से प्रेरित होकर उन्हें बहादुर का शीर्षक दिया गया। अंतिम युद्ध में कमजोर पड़ने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी थी। वे मुगल साम्राज्य के एक निडर योद्धा थे। औरंगजेब इतिहास के सबसे सशक्त और शक्तिशाली राजा माने जाते थे।

औरंगज़ेब के पुत्रों में बड़े का नाम मुअज़्ज़म और छोटे का नाम आज़म था। मुअज़्ज़म औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद मुग़ल सम्राट हुआ।

हालाँकि औरंगजेब की बहुत आलोचन भी होती हैं. उनकी मृत्यु के 15-16 वर्ष बाद ही मुगल-साम्राज्य का अंत हो गया. प्रो. कादरी ने लिखा है- ‘बाबर ने मुग़ल राज्य के भवन के लिए मैदान साफ़ किया, हुमायूँ ने उसकी नीव डाली, अकबर ने उस पर सुंदर भवन खड़ा किया, जहाँगीर ने उसे सजाया−सँवारा, शाहजहाँ ने उसमें निवास कर आंनद किया; किंतु औरंगज़ेब ने उसे विध्वंस कर दिया था।’

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