राम जेठमलानी की जीवनी | Ram Jethmalani Biography in Hindi

Ram Jethmalani – राम जेठमलानी एक सुप्रसिद्ध भारतीयवकील और राजनीतिज्ञ थे। 6ठी व 7वीं लोक सभा में वे भारतीय जनता पार्टी से मुंबई से दो बार चुनाव जीते थे। बाद में अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में केन्द्रीय कानून मन्त्री व शहरी विकास मन्त्री रहे थे। किसी विवादास्पद बयान के चलते उन्हें जब भाजपा से निकाल दिया था तो उन्होंने वाजपेयी के ही खिलाफ लखनऊ लोकसभा सीट से 2004 का चुनाव लड़ा था किन्तु हार गये। 7 मई 2010 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया था।

2010 में उन्हें फिर से भाजपा ने पार्टी में शामिल कर लिया था और राजस्थान से राज्य सभा का सांसद बनाया। राम जेठमलानी उच्च प्रोफाइल से सम्बन्धित मामलों के मुकदमे की पैरवी करने के कारण विवादास्पद रहे और उसके लिए उन्हें कई बार कड़ी आलोचना का सामना भी करना पड़ा था। यद्यपि वे उच्चतम न्यायालय के सबसे महँगे वकील थे इसके बावजूद उन्होंने कई मामलों में नि:शुल्क पैरवी की। दिनांक 8 सितम्बर 2019 को स्वास्थ खराब होने के कारण उनका निधन हो गया।

प्रारंभिक जीवन – Ram Jethmalani Biography in Hindi

राम जेठमलानी का जन्म 14 सितम्बर 1923 को ब्रिटिश भारत के शिकारपुर शहर में जो आजकल पाकिस्तान के सिन्ध प्रान्त में है, इनके पिता का नाम भूलचन्द गुरुमुखदास जेठमलानी व उनकी माता पार्वती भूलचन्द था। सिन्धी प्रथानुसार पुत्र के साथ पिता का नाम भी आता है अत: उनका पूरा नाम रामभूलचन्द जेठमलानी था लेकिन क्योंकि उनके बचपन का नाम राम था इसलिए आगे चलकर वे राम जेठमलानी के नाम से ही मशहूर हो गये।

स्कूली शिक्षा के दौरान दो-दो क्लास एक साल में पास करने के कारण उन्होंने 13 साल की उम्र में मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली और 17 साल की उम्र में ही एल०एल०बी० की डिग्री हासिल कर ली थी। उस समय वकालत की प्रैक्टिस करने के लिये 21 साल की उम्र जरूरी थी मगर जेठमलानी के लिये एक विशेष प्रस्ताव पास करके 18 साल की उम्र में प्रैक्टिस करने की इजाजत दी गयी। बाद में उन्होंने एस०सी०साहनी लॉ कॉलेज कराची एल०एल०एम० की डिग्री प्राप्त की।

18 साल से कुछ ही अधिक उम्र में उनकी शादी पारम्परिक हिन्दू पद्धति से दुर्गा नाम की एक कन्या से कर दी गयी। 1947 में भारत-पाकिस्तान के बँटवारे से कुछ ही समय पूर्व उन्होंने रत्ना साहनी नाम की एक महिला वकील से दूसरा विवाह कर लिया। जेठमलानी के परिवार में उनकी दोनों पत्नियों से कुल चार बच्चे हैं-रानी, शोभा और महेश, तीन दुर्गा से तथा एक जनक, रत्ना साहनी से।

कैरियर – Ram Jethmalani Life History

राम जेठमलानी ने अपने करियर की शुरुआत पकिस्‍तान में लॉ प्रोफेसर के रूप में की। अपने 6 साल बड़े दोस्त ए.के. ब्रोही के साथ कराची में अपनी कानूनी संस्था प्रारंभ की। मगर 1948 में कराची में दंगे भड़क जाने के कारण अपने दोस्त ब्रोही के ही कहने पर वे भारत आ गए। राम जेठमलानी अपने पहले ही केस से चर्चित हो गए थे, जो उन्होंने 1959 में लड़ा था। ये केस था नानावती बनाम महाराष्ट्र सरकार का. ये केस उन्होंने यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ के साथ लड़ा था, जो बाद में देश के चीफ जस्टिस भी बने थे।

वह दिल्ली और मुंबई की अदालतों में कई स्मगलरों के केस की भी पैरवी कर चुके हैं। अधिकतर मामलों में जेठमलानी ने अपने क्लाइंट्स को जीत भी दिलाई। 70-80 के दशक में तो उन्हें ‘स्मगलरों का वकील’ भी कहा जाने लगा था। उन्होंने 1960 के दशक में मुंबई के मशहूर डॉन हाजी मस्तान के भी स्मगलिंग से जुड़े कई केस लड़े थे। जेठमलानी कई हाई-प्रोफाइल प्रकरणों के कारण हमेशा चर्चा में रहे।

उन्होंने आसाराम को यौन उत्‍पीड़न मामले में बचाने, 2011 में राजीव गांधी के हत्‍यारे, इंदिरा गांधी के हत्‍यारे, हर्षद मेहता और केतन पारेख का स्‍टॉक मार्केट घोटाला, हाजी मस्‍तान, अफलज गुरु की फांसी के खिलाफ, लालकृष्‍ण आडवाणी का हवाला घोटाला, जेसिका लाल हत्‍याकांड में मनु शर्मा का केस, अमित शाह, कनिमोझी, वाईएस जगमोहन रेड्डी, येदियुरप्‍पा, रामदेव तथा शिवसेना का केस लड़ा और उनका बचाव किया।

2017 में राम जेठमलानी ने क़ानूनी पेशे से रिटायरमेंट की घोषणा कर दी थी। जेठमलानी 1988 में राज्यसभा सांसद बने थे। इसके बाद से वो मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय रहे। 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में जेठमलानी क़ानून मंत्री बने।

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्हें शहरी विकास मंत्रालय दिया गया। 1999 में एक बार फिर से क़ानून मंत्री बने लेकिन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस एएस आनंद और अटॉर्नी जनरल से मतभेद के कारण प्रधानमंत्री ने इस्तीफ़ा देने को कह दिया था। तब अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी थे।

सन 1971 में वे पहली बार लोक सभा के लिए उल्हास नगर क्षेत्र से चुनाव लड़े पर सफलता नहीं मिली। देश में आपातकाल के दौरान (1975-77) वे ‘बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया’ के अध्यक्ष थे और तत्कालीन प्रधानमंत्री की कड़ी आलोचना की। इसका परिणाम यह हुआ कि उनके विरुद्ध अरेस्ट वारंट जारी किया गया जिसके बाद वे देश छोड़कर कनाडा चले गए। आपातकाल के समाप्ति के बाद वे भारत वापस लौट आये।

आपातकाल के बाद सन 1977 के चुनाव में उन्होंने तत्कालीन कानून मंत्री एच.आर. गोखले को बॉम्बे लोक सभा क्षेत्र से हराकर पहली बार लोक सभा में प्रवेश किया पर वे कानून मंत्री नहीं बन पाए क्योंकि मोरारजी देसाई को उनकी जीवन शैली नहीं पसंद थी। सन 1980 में उन्होंने एक बार फिर लोक सभा चुनाव जीता पर सन 1985 में सुनील दत्त के विरुद्ध सफल नहीं हो पाए।

सन 1988 में उन्हें राज्य सभा के लिए चुना गया और सन 1996 में वाजपयी सरकार में केन्द्रीय कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्री बनाये गए। सन 1998 में उन्हें शहरी मामलों और रोज़गार मंत्री बनाया गया पर सन 1999 में उन्हें दोबारा कानून, न्याय और कंपनी मामलों का मंत्री बनाया गया पर सर्वोच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश ए.एस. आनंद पर उनके विवादस्पद बयान के कारण प्रधानमंत्री वाजपयी ने उन्हें मंत्री पद छोड़ने को कहा।

सन 2004 के लोक सभा चुनाव में वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विरुद्ध लखनऊ लोक सभा क्षेत्र से एक निर्दलीय उमीदवार के तौर पर चुनाव में खड़े हुए पर करारी हार का सामना करना पड़ा। सन 2010 में उन्हें एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान से राज्य सभा का सदस्य बनाया। 2010 में जेठमलानी ने चीनी उच्‍चायोग के सामने चीन की खिंचाई करते हुए, उसे भारत और पाकिस्‍तान के बीच मतभेद को बढ़ाने के लिए जिम्‍मेदार बताया। मई 2013 में भाजपा ने उन्‍हें पार्टी के खिलाफ जाकर बयान देने के कारण 6 सालों के लिए पार्टी से निकाल दिया।

निधन – Ram Jethmalani Death 

जेठमलानी की मृत्यु 8 सितंबर 2019 को नई दिल्ली में उनके घर पर हुई। उनके बेटे महेश जेठमलानी के अनुसार, वह पिछले कुछ महीनों से ठीक नहीं थे; राम जेठमलानी ने अपने 96 वें जन्मदिन के ठीक छह दिन पहले 7:45 बजे सुबह अंतिम सांस ली।

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