मीरा बाई की जीवनी | Sant Meera Bai Biography in Hindi

Sant Meera Bai Biography in Hindi,

पूरा नाम    –  मीरा बाई.   –  (Meera Bai Biography in Hindi)
जन्म        –  1547
जन्मस्थान  –  मेड़ता (राजस्थान)
पिता         –  रतनसिंह
माता         –  विरकुमारी
विवाह       –  महाराणा कुमार भोजराज जी के साथ.

Meera Bai Biography & Life History in Hindi :- 

मीरा बाई एक मध्यकालीन हिन्दू आध्यात्मिक कवियित्री और बहुत बड़ी कृष्ण भक्त थीं। श्रद्धा से भरे रचना के लिए आज भी मीराबाई का नाम आदर से लिया जाता है। उनके जन्म काल के बारे में ठिक से जानकारी नहीं है फिर भी मध्यकालीन में हुयी भारत में की श्रेष्ठ संत कवियित्री आज भी आदर के पात्र है। उनके अनुसार, मीराबाई का जन्म राजस्थान के मेड़ता में सन 1498 में एक राजपरिवार में हुआ था। उनके पिता रतन सिंह राठोड़ एक छोटे से राजपूत रियासत के शासक थे। वे अपनी माता-पिता की इकलौती संतान थीं और जब वे छोटी थीं तभी उनकी माता का निधन हो गया था।

मीरा का लालन-पालन उनके दादा के देख-रेख में हुआ जो भगवान् विष्णु के गंभीर उपासक थे और एक योद्धा होने के साथ-साथ भक्त-हृदय भी थे और साधु-संतों का आना-जाना इनके यहाँ लगा ही रहता था। इस प्रकार मीरा बचपन से ही साधु-संतों और धार्मिक लोगों के सम्पर्क में आती रहीं। मीराबाई ने खुद की जीवन में बहुत दुख सहा था। इनका विवाह उदयपुर के महाराणा कुमार भोजराज जी के साथ हुआ था। विवाह के थोड़े ही दिन के बाद आपके पति का स्वर्गवास हो गया था। पति के परलोकवास के बाद इनकी भक्ति दिन- प्रति- दिन बढ़ती गई। और कृष्ण को अपना पति मानकर उनका कृष्णप्रेम बहुत तीव्र होता गया।

मीराबाई का कृष्णभक्ति में नाचना और गाना राज परिवार को अच्छा नहीं लगा। उन्होंने कई बार मीराबाई को विष देकर मारने की कोशिश की। घर वालों के इस प्रकार के व्यवहार से परेशान होकर वह द्वारका और वृंदावन गईं। वह जहाँ जाती थीं, वहाँ लोगों का सम्मान मिलता था। लोग उनको देवियों के जैसा प्यार और सम्मान देते थे।

मीराबाई पर अनेक भक्ति संप्रदाय का प्रभाव था। इसका चित्रण उनकी रचनाओं में दिखता है। ‘पदावली’ ये मीराबाई की एकमात्र, प्रमाणभूत काव्यकृती है। ‘पायो जी मैंने रामरतन धन पायो’ ये मीराबाई की प्रसिद्ध रचना है, ‘मीरा के प्रभु गिरिधर नागर’ ऐसा वो खुदका उल्लेख करती है। भारतीय परंपरा में भगवान् कृष्ण के गुणगान में लिखी गई हजारों भक्तिपरक कविताओं का सम्बन्ध मीरा के साथ जोड़ा जाता है।

मीराबाई के भाषाशैली में राजस्थानी, ब्रज और गुजराती का मिश्रण है। पंजाबी, खड़ीबोली, पुरबी इन भाषा का भी मिश्रण दिखता है। मीराबाई रैदास को अपना गुरु मनती हैं।

मीरा द्वारा रचित ग्रंथ :-

मीराबाई ने चार ग्रंथों की रचना की –

  •  बरसी का मायरा.
  •  गीत गोविंद टीका.
  •  राग गोविंद.
  •  राग सोरठ के पद.

इसके अलावा मीराबाई के गीतों का संकलन “मीराबाई की पदावली’ नामक ग्रन्थ में किया गया है।

मीराबाई के रचनाये बहुत भावपूर्ण है। वह अपने इष्टदेव कृष्ण की भावना प्रियतम या पति के रुप में करती थी। उनका मानना था कि इस संसार में कृष्ण के अलावा कोई पुरुष है ही नहीं। कृष्ण के रुप की दीवानी थी।

मीरा बाई की मृत्यु :-

ऐसा माना जाता है कि बहुत दिनों तक वृन्दावन में रहने के बाद मीरा द्वारिका चली गईं जहाँ सन 1560 में वे भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति में समा गईं। (Meera Bai Biography in Hindi)

और अधिक लेख :-

Please Note : – Sant Meera Bai Biography in Hindi मे दी गयी Information अच्छी लगी हो तो कृपया हमारा फ़ेसबुक (Facebook) पेज लाइक करे या कोई टिप्पणी (Comments) हो तो नीचे करे। Meera Bai Short Biography & Life story In Hindi व नयी पोस्ट डाइरेक्ट ईमेल मे पाने के लिए Free Email Subscribe करे, धन्यवाद।

loading...

LEAVE A REPLY