मुगल सम्राट जहाँगीर का इतिहास | Jahangir History In Hindi

The Great King Jahangir History In Hindi,

Mughal Emperor Jahangir History In Hindi – जहाँगीर :-


जहाँगीर का जन्म 30 अगस्त 1569 को सम्राट अकबर की हिंदू पत्नी जोधाबाई की कोख से हुआ था। उनका पूरा नाम नुरुद्दीन मोहम्मद सलीम/Salim था। उन्हे 24 अक्तूबर 1605 मे राजगद्दी सौंपी गई थी जिस पर आसीन होकर वे सम्राट जहाँगीर कहलाने लगे। 36 साल की उम्र में उन्होंने अपने शासन की शुरुआत की और 22 वर्षो तक शासन किया। इस दौरान उन्होने अनेक लड़ाइयाँ भी लड़ी। जहांगीर का अर्थ होता है दुनिया का विजेता। उसने कांगड़ा और किश्‍वर के अतिरिक्‍त अपने राज्‍य का विस्‍तार किया और मुगल साम्राज्‍य में बंगाल को भी शामिल कर दिया। जहांगीर को न्याय की जंजीर के लिए भी याद किया जाता है उन्हें भारतीय इतिहास में भारत के महान सम्राटो में से एक और मुघल के चौथे महान शक्तिशाली सम्राट कहा जाता है।

जहाँगीर मुघल सम्राट अकबर के सबसे बड़े बेटे थे और कम उम्र में ही वे अपनी पिता की चुनौतियों पर खरे साबित हुए थे। अपनी ताकत के प्रति उत्सुक होकर उन्होंने 1599 में जब अकबर डेक्कन में व्यस्त थे तब विद्रोह शुरू किया था। जहा जहाँगीर की हार हुई लेकिन वे 1605 में सम्राट बनने में सफल हुए क्युकी अकबर के हरम की महिलाये जैसे रुकैया सुल्तान बेगम, सलीमा सुल्तान बेगम और उनकी दादी मरयम मकानी ने उन्ही बहोत सहायता की। इन सभी महिलाओ का अकबर के जीवन में बहुत महत्त्व था इसीलिए जहाँगीर सम्राट बनने में सफल हुए।

सलीम और अनारकली की मोहब्बत की कहानी – Salim And Anarkali Love Story Hindi :-

सलीम और अनारकली एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। परंतु ये बात बादशाह अकबर को पसंद नही थी, और अकबर ने दोनो को अलग करने के लिए कई हथकंडे लगाए, पर अलग नही करने सके। अंत: सलीम ने अनारकली के लिए बग़ावत कर दिया पर सलीम की हर हुई। उस समय बादशाह अकबर ने कहा या तुम अपने आप को मौत के हवाले कर दो या अनारकली को हमारे हवाले कर दो, लेकिन सलीम ने अपने प्यार के खातिर अपने आप को मौत से गले लगाने के लिए तैयार हो गाए। परंतु उसी समय अनारकली और खुद के बादशाह अकबर के हवाले कर दी, और सलीम का जान बचा ली इसके बाद बादशाह अकबर ने उसे दीवारो मे चुनावा दिया और सिसक कर एक जिंदा मोहब्बत ने दम तोड़ दिया।

एक नज़र मे जहाँगीर का इतिहास  :- 

  • अकबर ने सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के नाम पर अपने बेटे का नाम सलीम रखा था।
  • जहाँगीर ने अपने पिता की वसीयत पर एक विशाल साम्राज्य का निर्माण कर रखा था, जिनके पास अपार सैन्य बल था, मजबूत आर्थिक परिस्थिती थी, शक्तिशाली योद्धा थे।
  • जहांगीर के पांच बेटे थे- (i) खुसरो (ii) खुर्रम (iii) शहरयार (iv) जहांदार
  • जहाँगीर के शासन पे उनके बड़े बेटे खुसरु मिर्ज़ा ने बगावत की. जहा जल्द ही मिर्ज़ा को निचे झुकना पड़ा। बगावत करने वालो में से लगभग 2000 सदस्यों को अपने वश में लेने के बाद जहाँगीर ने उनके विश्वासघाती बेटे को अँधा कर दिया।
  • खुसरो की सहायता करने के लिए जहांगीर ने सिक्खों के 5वें गुरु अर्जुन देव को फांसी दिलवा दी थी।
  • जहांगीर को न्याय की जंजीर के लिए भी याद किया जाता है. ये जंजीर शाहजहां ने सोने की बनवाई थी. जो आगरे के किले शाहबुर्ज और यमुना तट पर स्थित पत्थर के खंबे में लगवाई हुई थी।
  • जहाँगीर कई सारे हिंदु राजा, राजपूतो के साथ व्यवहार करते थे, और उनसे अपने रिश्तो को मजबूत बनाने की कोशिश भी किया करते थे. जहाँगीर की दिल और इच्छाशक्ति को देखते हुए कई हिंदु राजपूतो ने भी जहाँगीर मुघल प्रभुत्वता को स्वीकार कर लिया था, और अपने साम्राज्य को मुघल साम्राज्य में शामिल कर एक अविभाजित वर्ग बना लिया था।
  • नूरजहां ईरानी निवासी मिर्जा ग्यास बेद की बेटी थी. उनका वास्तविक नाम मेहरून्निसा था। 1549 ई में नूरजहां का विवाह अलीकुली बेग से हुआ। जहांगीर ने अलीकुली बेग को एक शेर मारने के कारण शेर अफगान की उपाधि दी थी। 1607 ई में शेर अफगान की मौत के बाद मेहरून्निसा अकबर की विधवा सलीमा बेगम की सेवा में नियुक्त हुई। सबसे पहले जहांगीर ने नवरोज के अवसर पर मेहरून्निसा को देखा था और उससे 1611 ई में विवाह कर लिया। विवाह के बाद जहांगीर ने उसे नूरमहल और नूरजहां की उपाधि दी।
  • जहाँगीर को कला, विज्ञानं और हस्तकला में बहोत रूचि थी। अपने जवानी के दिनों से ही वे पेंटिंग सीखते रहते थे. उन्होंने अपने साम्राज्य में कला का काफी विकास कर के रखा था। जहाँगीर के शासन काल में मुघल शासको की पेंटिंग बहुत विकसित की गयी थी. उस समय पुरे विश्व में यह काफी चर्चा का विषय बन चूका था। उन्हें पेंटिंग में रूचि होने के साथ-साथ प्राकृतिक विज्ञानं में भी रूचि थी. उस समय जहाँगीर के शासन काल में पेंटर उस्ताद मंसूर जानवरों के और पेड़-पौधों के मशहूर चित्र निकलते थे, उस्ताद मंसूर को उनके जीवन में जहाँगीर ने कई बार स्वर्ण मुद्राये भेट स्वरुप दी है।
  • जहाँगीर को प्राणियों से बहोत लगाव था इसलिए उसने अपने साम्राज्य में कई प्राणी संग्रहालय भी बना रखे थे. जहाँगीर को पेंटिंग के अलावा यूरोपियन और पारसी कला बहुत पसंद थी। जहाँगीर ने अपने साम्राज्य में पारसी परम्पराओ को विकसित कर रखा था। विशेषतः तब जब एक पारसी रानी, नूर जहा ने उनका मन मोह लिया था। जहाँगीर के साम्राज्य की विशेष धरोहर के रूप में कश्मीर में स्थित उनका शालीमार बाग़ है. मुघल वैज्ञानिको द्वारा जहाँगीर के शासनकाल में दुनिया का दिव्य पिंड बनाया गया, जिसे कही से भी किसी प्रकार का कोई जोड़ नहीं था।
  • इतमाद-उद-दौला का मकबरा 1626 ई में नूरजहां बेगम ने बनवाया था.मुगलकालीन वास्तुकला के अंतर्गत यह पहली आसी इमारत थी जो सफेद संगमरमर से बनी थी।
  • अशोक को कौशांबी स्तंभ पर समुंद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति और जहांगीर का लेख उत्कीर्ण है।
  • जहांगीर के शासनकाल में कैप्टन हॉकिंस, सर टॉमस रो एडवर्ड टेरी जैसे यूरोपीय यात्री आए थे।
  • जहांगीर के मकबरे का निर्माण नूरजहां ने करवाया था।
  • जहाँगीर ने अपनी सेना को ये बता रखा था की,”वे किसी को भी जबरदस्ती मुस्लिम बनने के लिए ना कहे”. जहाँगीर द्वारा जजिया कर को भी लगाने से मना किया गया। जहाँगीर के दरबार में हर कोई आ-जा सकता था, फिर चाहे वो किसी भी धर्मं का क्यू ना हो. उनके दरबार में दोनों मुस्लिम प्रजातिया सुन्नी और शिया को समान दर्जा दिया जाता था।
  • जहाँगीर उनकी बुरी आदतों (व्यसन) के बिना अधूरे है. उन्होंने अपने पुत्रो के सामने एक विशाल साम्राज्य की मिसाल कड़ी कर रखी थी लेकिन साथ ही उनको शराब, अफीम और महिलाओ के लत होने से उनकी काफी आलोचना की जाती।
  • जहाँगीर के बेटे खुर्रम को डर था की कही उसे सिंहासन के हक्क से निकाल ना दिया जाए इसलिए उसने 1622 में पुनः बगावत की. जहाँगीर की सेना ने खुर्रम का विनाश करना शुरू किया, जहा खुर्रम की सेना फतेहपुर सिकरी से डेक्कन की ओर बढ़ी, फिर बंगाल से पीछे गयी और ये सब तब तक चलता रहा जब तक 1926 में खुर्रम ने स्वयम का आत्मसमर्पण नहीं किया। इस बगावत का जहाँगीर के स्वस्थ पर बहोत बुरा प्रभाव पड़ा. और इसी वजह से 1627 में उनकी मृत्यु हो गयी और अंत में खुर्रम को राजगद्दी प्राप्त हुई और बाद में वाही हिन्दुस्तान का शाह जहाँ बना।
  • सम्राट जहाँगीर एक परिश्रमी, दृढ़ संकल्प रखने वाले एवं प्राणीप्रिय शासक ही नही थे, बल्कि वे विज्ञान और उसके चमत्कारो के शोधकर्ता भी थे। वे समुचित दंड और नेक व्यवहार के सच्चे हिमायती थे। उन्होने अपने समय मे अनेक पार्को, स्मारको तथा बगीचो का निर्माण कराया था।

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