कुशल वक्ता कैसे बने: तरीका | How to be a good speaker in hindi

Good Speaker / एक अच्छा वक्ता होना आपको अपनी संवाद क्षमता को बढ़ा कर अपने संपर्कों को बढ़ाने में भी सहायता करता है। एक आम व्यक्ति भी भीड़ से अलग नजर आ सकता है, यदि वह एक अच्छा वक्ता हो! 

कुशल वक्ता कैसे बने: तरीका | How to be a good speaker in hindiकई लोगों के लिए भाषण देना एक बहुत मुश्किल काम है, स्टेज पर खड़े होते ही पसीना छूट जाता है। ग्रुप सेमिनार, किसी मीटिंग, या स्टेज पर जाने के नाम से डरते हैं। हालांकि ये भी सच है कि तीन-चार बार स्टेज से बोलने के बाद आपका ये डर खत्म हो जाता है या कम हो जाता है। वक्ता तो आप बन जाते हैं, लेकिन कुशल वक्ता होना आसान नहीं।

लेकिन ऐसा भी नही की जो लोग कुशल वक्ता हो, वो जन्मजात से ऐसा हो। ये थोड़ा मुश्किल जरूर हो लेकिन नामुमकिन नहीं, ड्राइविंग और स्विमिंग की तरह थोड़ी सी प्रेक्टिस और कुछ नियमों को लगातार फॉलो करने से आप अच्छे वक्ता बन सकते हैं, हां पर बिना क्रिएटिव माइंड के राह आसान नहीं। कुछ खास बातों का ध्यान एक अच्छा वक्ता हमेशा रखता है। आइए जाने की किन बातो को ध्यान मे रख के आप कुशल वक्ता (Proficient speaker) बन सकते हैं।

How to become proficient speaker in hind :-

(1) अच्छा से तैयारी करे –

अपने कई बड़े नेताओ और अभिनेताओ को मंच पर आते वक्त देखा होगा कि कैसे वो मंच पर आते ही उत्साह और जोश से भर जाते हैं, उनका ये उत्साह दिखावा नहीं होता, उनका ज्ञान और विषय पर पकड़ उनकी आंखों में चमक की असली वजह होती है। तो जाहिर है आपको जिस विषय पर बोलना है, उसकी पहले से तैयारी बहुत जरूरी है। घबराहट एक ऐसी चीज है जो सबको होती है चाहे वो कुशल खिलाड़ी हो या नौसिखिया, सो उसे अपने ऊपर हावी ना होने दे। इससे बचने का एक ही तरीका है अभ्यास, आप जिस विषय पर, जिस जगह और जिस समूह के सामने स्पीच देने वाले हैं, उसके पूरी तैयारी होनी चाहिए। तैयारी करने के लिए खुद को पर्याप्त समय दें, इंटरनेट, अख़बार, लाइब्रेरी का पूरा प्रयोग करें और बढ़िया कंटेंट तैयार करें, और शीशे के सामने बोलके खुद अभ्यास करे, हो सके तो अपने भाषण की Recording कर के सुनें और गलितयों को सुधारें।  याद रखें आप चाहे कितना अच्छा बोलना क्यों न जानते हों, अगर आपका कंटेंट अच्छा नहीं है तो आप अपनी छाप नही छोड़ सकते हैं।

(2) श्रोताओं से जुड़ें –

सबसे पहले श्रोताओं से कनेक्ट होना बहुत जरूरी है, यदि आप पहले भी कभी उनके शहर में आ चुके हों तो उन बातों को दोहराइए, उस शहर के यादगार लम्हों को उनके सामने रखिये, उस स्थान के दुर्लभ स्मारकों की बात कीजिये। यदि उस अनगिनत की भीड़ में भी आप कुछ लोगों को जानते हों और वे प्रतिष्ठित हों, तो उनका आदरपूर्वक जिक्र कीजिये। श्रेताओ कनेक्ट होने के लिए कभी-कभी आप उनसे पर्सनल सवाल भी कीजिए कि क्या आपने ऐसा कभी किया है? या फिर आपमें से कितने लोग हैं जिनके घर में कोई सरकारी कर्मचारी है? हाथ उठाइए। आपने देखा होगा कई नेताओ को स्टेज पे आते ही ऐसा कुछ बोलते हैं- जब मैं यहां आ रहा था तो किसी ने मुझसे इस ईवेंट के बारे में ऐसा कहा।,,,, इन सब तरीक़ो को खुद के अंदर ढालने की कोशिश करे इससे आपके अंदर आत्मविश्वास बढ़ेगा।

(3) खुद पे विश्वास बनाए रखे –

कभी भी आत्मविश्वस ना खोए, हमेशा अपने आप को यह विश्वास दिलाते हुये दिमाग को संकेत दे कि आप एक सफल वक्ता है, क्योकि आप जैसा अपने दिमाग में सोचते है परिणाम भी उसी अनुरूप में आता है। आप अपने दिमाग को जिस कार्य दिशा की ओर संकेत देते है तो आप कार्य भी वैसा ही करने लग जाते है। मान लीजिए आपने बार-बार अपने दिमाग को यह संकेत दिया की आप असफल है तो निश्चित ही आप असफल होंगे। इसलिए अपने मन और मस्तिष्क को हमेशा सफलता और आत्मविश्वास का संकेत देते रहिये जिससे आप प्रसन्न रहेंगे। कभी भी अपने आप को कमजोर और हारा हो ना समझे।

(4) बिना देखे भाषण करे –

अगर आपको एक प्रभावी वक्ता बनना है तो आपको बिना देखे बोलना आना चाहिए। हाँ ये भी ज़रूरी हैं की आप अपने साथ कुछ Notes रख सकते हैं, या पूरा का पूरा भाषण भी साथ ले जा सकते हैं, पर आपकी तैयारी इतनी होनी चाहिए कि सुनने वाले को ये लगे कि आप बोल रहे हैं पढ़ नहीं रहे हैं।,,, लेकिन याद रखे, बिना देखे खराब भाषण देने से अच्छा है देख कर सही बातें बोली जाएं। इसलिए अगर आप बिना देखे बोलने में कठिनाई हो रही हो तो किसी बड़े अकेशन पर इसे ट्राइ करने के बजाये छोटे-मोटे अवसरों पर बिना देखे बोलने की कोशिस करते रहे। नित्य अभ्यास से कुछ भी असंभव नही. धीरे-धीरे आप देखेंगे आप इस कला में पारंगत हो गये है।

(5) श्रेताओ को ख्याल रखते हुए भाषण करे –

बोलने से पहले ये भी ध्यान में रखना जरूरी है कि सुनने वाले कौन हैं, मेजोरिटी किसकी है। जाहिए है बच्चे सामने बैठे हैं, तो आपको उनके मूड को ध्यान में रखना होगा, महिलाएं हैं तो उनसे जुड़ी बातों को अपने शब्दों में पिरोना होगा। कॉरपोरेट्स हैं तो उनकी डेली लाइफ से जुड़ी बातों, किस्सों को लेना होगा, युवा किसी और तरह के मूड में रहता है और गांव देहात के लोग अलग तरह की बातें सुनना चाहते हैं।

(6) ग़लती से घबराए नही –

दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नही जिससे कभी कोई गलती ना हुई हो। इंसान से ग़लती होना लाजमी हैं। बस एक बात का ध्यान रखे स्पीच के वक्त अगर आप कहीं अटक भी जाते है या व्याकरण (संबंधी) कोई गलती हो भी जाती है तो आपको बड़ी होशियारी के साथ उस परिस्थिति को अपने बोलने के अंदाज से छुपाना आना चाहिए। ऐसे हालात में आप अपनी गलती को मज़ाक का रुख़ भी दे सकते है या सरल शब्दों में ‘माफ़ कीजिए’ कह कर अपनी बात को आगे बढ़ा सकते है। ऐसे में कोई भी आपकी गलती पर ध्यान नही देगा। क्योकि इस बात से कोई भी अनभिज्ञ नही कि मंच पे जाकर बोलना कोई आसान काम नही होता। ऐसे में छोटी-मोटी चूक होना कोई बड़ी बात नही है।

(7) लय के साथ भाषण करे –

एक और बड़ी बात है लय और शैली। वक्ता यदि अपने ज्ञान का प्रदर्शन एक सुर में करता रहे तो शायद आधे से ज्यादा श्रोता सो जाएंगे। इसलिए माहौल बोरिंग ना हो, इसलिए इससे बचना जरूरी है। अपनी बातों में लय, रस और एक दिलचस्प शैली डेवलप करना बहुत जरूरी है। बस अपनी बात को महसूस करिए, और उसी भावनात्मक अंदाज में जनता के सामने रख दीजिए, देखिएगा श्रोता कैसे बहे चलेगा आपके साथ।

(8) भाषा का ज्ञान रखे –

अपनी भाषा शैली का हमेशा ख्याल रखे, ऐसा ना हो की आप बार-बार शब्दो को ग़लत बोले, इसलिए जो भी बोले आराम से बोले, आराम से बोलने से ग़लतियाँ नही होती हैं, और आप जहाँ भी जाए भाषण के लिए, वहा की लोकल भाषा का कुछ वर्ड का ज्ञान रखे जैसे – नमस्कार, सलाम, जोहार, आदि,, इससे श्रेता तहे दिल से आपके साथ जुड़ेंगे।

(9) किसी का भाषण का नकल ना करे –

कई लोग दूसरों के भाषण की नकल को हुबहू श्रोताओं तक पहुँचाते हैं लेकिन जो श्रोता उसी भाषण को सुन चुके हैं उसे सुनने के लिए वो दोबारा अपना समय नष्ट नहीं करेंगे, इसलिए अपने अक्ल और मन से काम लीजिए। शब्दों में सादगी के साथ अपने भाषण की शुरूआत कीजिये। किसी भी भाषण में अपने स्वयं की अलग पहचान बनाने का प्रयास कीजिये।

(10) अंत: मे सुक्रिया कहना ना भूले –

जिस तरह भाषण की शुरुआत रोचक होनी चाहिए, ठीक उसी तरह भाषण का अंत भी प्रभावशाली होना चाहिए। भाषण का अंत इतना जानदार हो कि लोग खड़े होकर जोश और तालियों के साथ आपका सम्मान करते हुए अच्छा महशुस करें। हमेशा आपको याद रखे उसके लिए स्पीच के अंत में आप किसी शायरी, चुटकुले या किसी व्यक्ति विशेष के विचार का भी उपयोग कर सकते है। क्योकि स्पीच या वार्तालाप का अंत सकारात्मकता के साथ हो तो वो पल श्रोताओं के लिए भी यादगार पलों में शामिल हो जाता है। अंत में सबसे ज़रूरी यह है कि आप उन सभी आयोजकों को शुक्रिया कहना ना भूले जिन्होनें आपके प्रोग्राम को व्यवस्थित बना कर रखा, जैसे कि स्पॉंसर, आयोजक, श्रोताओं आदि के सहयोग के लिए उन्हें धन्यवाद जरूर कहे, इससे आपको प्रसिद्धि मिलेगी।


और अधिक लेख –
loading...

LEAVE A REPLY