जैन धर्म का इतिहास (GK) History Of Jain Dharma In Hindi

bhagwan mahavir

History & Story Of Jain Dharma In Hindi : – दुनिया के सबसे प्राचीन धर्म जैन धर्म. को श्रमणों का धर्म कहा जाता है. वेदों में प्रथम तीर्थंकर ऋषभ देव का उल्लेख मिलता है। जो की भारत के चक्रवर्ती सम्राट भरत के पिता थे. उन्हे जैन धर्म की संस्थापक माना जाता है, वैदिक साहित्य में जिन यतियों और व्रात्यों का उल्लेख मिलता है वे ब्राह्मण परंपरा के न होकर श्रमण परंपरा के ही थे. मनुस्मृति में लिच्छवि, नाथ, मल्ल आदि क्षत्रियों को व्रात्यों में गिना है. जैन धर्म का मूल भारत की प्राचीन परंपराओं में रहा है। आर्यों के काल में ऋषभदेव और अरिष्टनेमि को लेकर जैन धर्म की परंपरा का वर्णन भी मिलता है। महाभारतकाल में इस धर्म के प्रमुख नेमिनाथ थे।

जैन धर्म – इतिहास की नजर में (GK):-

• जैन धर्म के संस्थापक तथा प्रथम तीर्थकर ऋषिभदेव थे. जैन धर्म के तेईसवें तीर्थकर पार्श्वनाथ थे.

• महावीर स्वामी चौबीसवे एवं अन्तिम तीर्थकर थे

• जैन धर्म दो पंथो-श्वेताम्बर एवं दिगंबर मे बाँट गया था श्वेताम्बर श्वेत वस्त्र धारण करते है, जबकि दिगंबर पन्थ को मानने वाले वस्त्रो पारित्याग करते है

• दिगंबर संप्रदाय मानता है कि मूल आगम ग्रंथ लुप्त हो चुके हैं, कैवल्य ज्ञान प्राप्त होने पर सिद्ध को भोजन की आवश्यकता नहीं रहती और स्त्री शरीर से कैवल्य ज्ञान संभव नहीं; किंतु श्वेतांबर संप्रदाय ऐसा नहीं मानते हैं।

• महावीर स्वामी का जन्म 540 ई. पू. पहले वैशाली के पास कुंडग्राम में हुआ था. बचपन का नाम वर्द्धमान था

• इनके पिता राजा सिद्धार्थ ज्ञातृक कुल के सरदार थे और माता त्रिशला लिच्छिवी राजा चेटक की बहन थीं. महावीर स्वामी की पत्नीथ का नाम यशोदा और पुत्री का नाम अनोज्जा प्रियदर्शनी था.

• जैन धर्म में ईश्वार नहीं आत्मा की मान्यता है.

• जैन धर्म के अधिकांश ग्रंथ प्राकृत भाषा मे रचित है

ज्ञान की प्राप्ति

•  महावीर का साधना काल 12 साल 6 महीने और 15 दिन का रहा. इस अवधि में भगवान ने तप, संयम और साम्यभाव की विलक्षण साधना की. इसी समय से महावीर जिन (विजेता), अर्हत (पूज्य), निर्ग्रंध (बंधनहीन) कहलाए.

•  स्थान – जंभिकग्राम के समीप

•  नदी – त्रिजूपलिका नदी के तट

•  वृक्ष – साल

•  जैन संघ – पावापुरी मे स्थापना

•  शिष्य – जमाली, चंदना सुधर्मण, महासयग, कूंदकोलिया, नन्दिनिपिय, कामदेव,
जैन महा संगिति

•  प्रथम संगिति 322 से 298 ई. पु. पाटलिपुत्र मे स्थुलभद्र की अध्यक्षयता मे हुई
•  दितीय संगिति 512 ई. पु. वल्लभी मे देवव्र्दी क्षमश्रवण की अध्यक्षयता मे हुई

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